स्टार्टअप Tornyol ने 40 ग्राम का एक ऐसा ड्रोन पेश किया है जो सोनार तकनीक का इस्तेमाल करके मच्छरों का पता लगाकर उन्हें हवा में ही खत्म कर देगा। यह तकनीक बीमारियों को फैलाने वाले मच्छरों से लड़ने का एक केमिकल-फ्री समाधान दे सकती है, हालांकि यह अभी टेस्टिंग फेज में है। निवेशकों को यह भी ध्यान देना चाहिए कि यह सिस्टम अभी बाहरी प्रोसेसिंग पर निर्भर है और इसे असली दुनिया में, बाहर इस्तेमाल के लिए अभी कई तकनीकी बाधाओं को पार करना होगा।
मच्छरों का शिकार करेगा 40 ग्राम का ड्रोन!
टेक्नोलॉजी स्टार्टअप Tornyol ने एक हथेली के आकार का ड्रोन (Drone) लॉन्च किया है। इसका मकसद मच्छरों से होने वाली बीमारियों से लड़ना है। यह ड्रोन हवा में उड़ते हुए मच्छरों का पता लगाकर उन्हें मार गिराएगा। करीब 40 ग्राम वजन वाले इस डिवाइस में अल्ट्रासोनिक सोनार सेंसर लगे हैं, जो कारों में पार्किंग असिस्टेंस के लिए इस्तेमाल होने वाले सेंसर जैसे ही हैं। ये सेंसर मच्छरों के पंखों की फड़फड़ाहट को ट्रैक करते हैं। जब सोनार से निकलने वाली ध्वनि तरंगें वापस आती हैं, तो डॉप्लर इफेक्ट (Doppler Effect) का विश्लेषण करके ड्रोन मच्छरों को दूसरे कीड़ों से अलग पहचान सकेगा और उन्हें फिजिकली टच करके खत्म कर देगा।
क्या हैं अभी की तकनीकी दिक्कतें?
यह ड्रोन एक कंट्रोल्ड इंडोर (Controlled Indoor) माहौल में मच्छरों का पता लगाने और उन्हें खत्म करने में सफल रहा है। लेकिन, यह अभी पूरी तरह से ऑटोमैटिक (Autonomous) नहीं है। इस डेमो (Demonstration) के लिए बाहरी मोशन-ट्रैकिंग कैमरों (Motion-tracking cameras) और ऑफबोर्ड कंप्यूटिंग पावर (Offboard computing power) का इस्तेमाल करना पड़ा। इस तकनीक को कामयाब बनाने के लिए, Tornyol को नेविगेशन, पहचान और प्रोसेसिंग जैसी सभी क्षमताओं को ड्रोन के ऑनबोर्ड हार्डवेयर (Onboard hardware) में इंटीग्रेट (Integrate) करना होगा। कंट्रोल्ड इनडोर टेस्टिंग से अप्रत्याशित बाहरी परिस्थितियों में इसे ले जाना कंपनी के लिए सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है।
स्वास्थ्य और बाजार के लिए क्या है मायने?
दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां केमिकल कीटनाशकों (Chemical insecticides) के विकल्पों की तलाश में हैं, क्योंकि मच्छर पारंपरिक तरीकों के प्रति रेजिस्टेंट (Resistant) होते जा रहे हैं। मलेरिया जैसी बीमारियां अभी भी गंभीर समस्या हैं, जिससे 2024 में अनुमानित 610,000 मौतें हुईं। इसके अलावा डेंगू, जीका और वेस्ट नाइल वायरस का प्रकोप भी जारी है। अगर यह ड्रोन तकनीक सफल होती है, तो यह मच्छरों को नियंत्रित करने का एक टारगेटेड (Targeted) और नॉन-टॉक्सिक (Non-toxic) तरीका साबित हो सकता है। हालांकि, इन ड्रोनों को बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने की लागत-प्रभावशीलता (Cost-effectiveness) और स्केलेबिलिटी (Scalability) के दावों की अभी तक किसी स्वतंत्र, थर्ड-पार्टी (Third-party) द्वारा पुष्टि नहीं हुई है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें:
कंपनी के फ्यूचर प्लान में ऐसे ड्रोन बनाना शामिल है जो मच्छरों की प्रजाति (Species) और लिंग (Sex) की पहचान कर सकें, क्योंकि नर और मादा मच्छरों के पंखों की फड़फड़ाहट की आवाज अलग होती है। इस स्पेस पर नजर रखने वाले निवेशकों के लिए मुख्य माइलस्टोन (Milestone) ऑनबोर्ड प्रोसेसिंग यूनिट का डेवलपमेंट और आउटडोर पायलट प्रोग्राम (Outdoor pilot programs) के नतीजे होंगे। निवेशकों को यह देखना होगा कि क्या कंपनी हवा और बारिश जैसे पर्यावरणीय कारकों से निपटने में सफल होती है, जो अक्सर माइक्रो-ड्रोन ऑपरेशन में बाधा डालते हैं। साथ ही, यह भी देखना होगा कि क्या वे प्रोटोटाइप (Prototype) स्टेज से आगे बढ़ने के लिए जरूरी फंडिंग (Funding) जुटा पाते हैं। चूंकि यह प्रोजेक्ट अभी रिसर्च और डेवलपमेंट (R&D) के बहुत शुरुआती दौर में है, इसलिए इसके कमर्शियल (Commercial) होने का रास्ता अनिश्चित है और इसमें बड़े एग्जीक्यूशन रिस्क (Execution risks) शामिल हैं।
