CSR खर्च में 17% की उछाल: FY26 में इन 5 दिग्गज कंपनियों का रहा दबदबा

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
CSR खर्च में 17% की उछाल: FY26 में इन 5 दिग्गज कंपनियों का रहा दबदबा

फाइनेंशियल ईयर 2026 (FY26) में भारत की टॉप 46 निफ्टी 50 कंपनियों ने अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) खर्च में **17%** की ज़बरदस्त बढ़ोतरी की है। कुल खर्च **₹11,391 करोड़** तक पहुंच गया है। HDFC Bank, Reliance Industries और TCS जैसी कंपनियों ने इस बार सबसे ज़्यादा योगदान दिया है, हालांकि हर कंपनी का बजट उनकी प्राथमिकताओं के हिसाब से अलग-अलग रहा है।

CSR खर्च में बड़ी बढ़ोतरी, जानिए किसने किया कितना खर्च?

FY26 में भारतीय कंपनियों के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) खर्च में एक महत्वपूर्ण उछाल देखा गया है। निफ्टी 50 की 46 कंपनियों ने मिलकर इस मद में 17% ज़्यादा, यानी कुल ₹11,391 करोड़ खर्च किए। हालांकि, यह खर्च कुछ बड़ी कंपनियों में ही ज़्यादा केंद्रित रहा। टॉप 5 योगदानकर्ताओं - HDFC Bank, Reliance Industries, Tata Consultancy Services (TCS), ICICI Bank और State Bank of India (SBI) - ने अकेले ही ₹5,143 करोड़ खर्च किए, जो कि इन कंपनियों के कुल CSR खर्च का लगभग 45% है।

दिग्गज कंपनियों का योगदान

इस लिस्ट में HDFC Bank सबसे आगे रहा, जिसने ₹1,316 करोड़ का CSR पर खर्च किया। Reliance Industries ने ₹1,223 करोड़ के साथ दूसरा स्थान हासिल किया, वहीं TCS ने ₹1,017 करोड़ खर्च किए। ICICI Bank और SBI भी टॉप योगदानकर्ताओं में शामिल रहे, जिन्होंने क्रमशः ₹878 करोड़ और ₹709 करोड़ खर्च किए।

खर्च में बड़ा अंतर, कुछ कंपनियों ने बढ़ाई तो कुछ ने घटाई राशि

कंपनियों के बीच CSR खर्च के पैटर्न में काफी भिन्नता देखी गई। कई कंपनियों ने अपने सामाजिक निवेश में भारी इज़ाफ़ा किया। उदाहरण के लिए, Adani Ports and Special Economic Zone ने पिछले साल के ₹4.5 करोड़ की तुलना में अपना CSR बजट बढ़ाकर ₹154 करोड़ कर दिया। वहीं, Bharti Airtel ने भी अपना योगदान ₹31 करोड़ से बढ़ाकर ₹176 करोड़ कर दिया। दूसरी ओर, कुछ बड़ी कंपनियों ने अपने CSR बजट में कटौती की। Reliance Industries और Tata Steel ने पिछले फाइनेंशियल ईयर की तुलना में कम खर्च दिखाया, जो ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्रों में पूंजी आवंटन प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत देता है।

निवेशकों के लिए CSR का महत्व

निवेशकों के लिए इन आंकड़ों को समझना एनवायरनमेंटल, सोशल और गवर्नेंस (ESG) के नज़रिए से महत्वपूर्ण है। कंपनी अधिनियम के अनुसार, योग्य भारतीय कंपनियों को अपने पिछले तीन वर्षों के औसत नेट प्रॉफिट का 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना अनिवार्य है। यह सिर्फ एक अनुपालन की आवश्यकता नहीं है, बल्कि इन खर्चों की गुणवत्ता और प्रभाव कंपनी की ब्रांड प्रतिष्ठा और लंबी अवधि की लागत को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि कंपनी के CSR खर्च और उसके शेयर की कीमत में सीधे अल्पकालिक संबंध का कोई पुख्ता सबूत नहीं है। बाज़ार आमतौर पर इन खर्चों को कंपनी की तत्काल वित्तीय प्रदर्शन के बजाय उसकी दीर्घकालिक स्थिरता रणनीति का हिस्सा मानता है।

आगे क्या?

देश भर में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा CSR फंड के सबसे बड़े लाभार्थी बने हुए हैं, जहाँ पूरे फाइनेंशियल ईयर में कुल CSR खर्च ₹40,794 करोड़ तक पहुँच गया। भविष्य में, निवेशकों के लिए सिर्फ खर्च की गई राशि की मात्रा ही नहीं, बल्कि इन परियोजनाओं को कितनी प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है और रिपोर्ट किया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। जो कंपनियाँ CSR को केवल एक अनुपालन अभ्यास मानने के बजाय अपनी मुख्य व्यावसायिक रणनीति में एकीकृत करती हैं, वे समय के साथ स्थायी ब्रांड वैल्यू बनाने में बेहतर स्थिति में हो सकती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.