ITC, Godfrey Phillips के शेयर रॉकेट! कीमतों में Big Hike, जानिए नए GST का क्या होगा असर?

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AuthorMehul Desai|Published at:
ITC, Godfrey Phillips के शेयर रॉकेट! कीमतों में Big Hike, जानिए नए GST का क्या होगा असर?
Overview

सिगरेट कंपनियों ITC Ltd. और Godfrey Phillips India Ltd. के शेयरों में 6 फरवरी 2026 को ज़बरदस्त उछाल देखा गया। कंपनियों ने अपने सिगरेट पोर्टफोलियो में **15% से 30%** तक की बढ़ोतरी की है, ताकि 1 फरवरी से लागू हुए **40%** के नए GST का असर संभाला जा सके। ITC का मार्केट कैप **₹4.02 लाख करोड़** के पार चला गया, जबकि Godfrey Phillips के शेयरों में भी शानदार तेजी आई।

कीमतों में Big Hike, शेयरों में Big Jump!

6 फरवरी 2026 को ITC और Godfrey Phillips के निवेशकों के लिए एक राहत भरी खबर आई। नई टैक्स व्यवस्था के भारी दबाव को झेल रही इन सिगरेट कंपनियों ने अपने उत्पादों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिसका सीधा असर स्टॉक मार्केट पर दिखा। इस कदम से कंपनियों ने पिछले महीने की गिरावट को पलटने की कोशिश की है और निवेशकों का भरोसा वापस जीतने का संकेत दिया है।

कीमतों का दांव और स्टॉक का कमाल

ITC Ltd. के शेयर 5.5% तक चढ़ गए, जिससे कंपनी का मार्केट कैप एक बार फिर ₹4.02 लाख करोड़ के आंकड़े को पार कर गया। यह पिछले दो दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ने वाला रहा। वहीं, Godfrey Phillips India Ltd. के शेयरों में 11.3% का शानदार उछाल देखा गया। यह तेज़ी बताती है कि बाजार को इन कंपनियों की लागत वसूलने की क्षमता पर भरोसा है। खबरों के मुताबिक, कंपनियों ने 15% से 30% तक की बढ़ोतरी की है, खास तौर पर महंगी सिगरेट के पैकेट पर। उदाहरण के लिए, Godfrey Phillips के 97mm वाले पैक की कीमत 25% बढ़कर ₹240 से ₹300 हो गई। इस दौरान ITC के शेयर करीब ₹324.25 पर ट्रेड हुए, जिसमें लगभग 15.8 मिलियन शेयरों का वॉल्यूम देखा गया, जिसने Nifty 50 की रिकवरी में भी मदद की। Godfrey Phillips में भी मज़बूत ट्रेडिंग हुई, और यह सेक्टर व बड़े मार्केट इंडेक्स दोनों से बेहतर प्रदर्शन करते दिखे। इनके शेयर करीब ₹2,206.9 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे, और लगभग 1.97 लाख शेयरों का वॉल्यूम दर्ज किया गया।

टैक्स के जाल से कैसे निकलेंगी कंपनियां?

1 फरवरी 2026 से सिगरेट पर लागू हुए 40% GST ने पिछले महीने यानी जनवरी में इन शेयरों पर भारी बिकवाली कराई थी। ITC ने तो पिछले तीन दशकों में अपना सबसे खराब जनवरी का आगाज़ देखा था और शेयर तीन साल के निचले स्तर पर आ गए थे। हालांकि, कीमतों में यह बढ़ोतरी तुरंत राहत देने वाली है, लेकिन लंबी अवधि में इसकी कामयाबी इस बात पर निर्भर करेगी कि ग्राहक बढ़ी हुई कीमतों को कितना स्वीकार करते हैं और भविष्य में सरकार कोई और अतिरिक्त ड्यूटी लगाती है या नहीं। बाजार की सकारात्मक प्रतिक्रिया यह ज़रूर दर्शाती है कि निवेशक कंपनियों की लागत ग्राहकों पर डालने की क्षमता को आंक रहे हैं। लेकिन, ज़्यादा कीमतों के चलते मांग में कमी (demand destruction) एक छिपा हुआ जोखिम बना हुआ है।

सेक्टर का नज़रिया और तुलना

Tobacco सेक्टर का P/E अनुपात फिलहाल 34.06 के आसपास है। ITC, जिसका मार्केट कैप ₹4.02 लाख करोड़ है, FMCG के कई सेगमेंट्स में फैला हुआ है और घरेलू सिगरेट मार्केट में 80% की हिस्सेदारी रखता है। यह कंपनी के मुनाफे का बड़ा जरिया है। वहीं, Godfrey Phillips, जिसका मार्केट कैप करीब ₹30,000-34,000 करोड़ है, भारत में Marlboro ब्रांड बेचती है और डोमेस्टिक सिगरेट मार्केट में लगभग 14% हिस्सेदारी रखती है। वैसे तो दोनों कंपनियां सेक्टर P/E से नीचे ट्रेड कर रही हैं, लेकिन Godfrey Phillips का P/E ratio 23.6-33.7 के बीच है, जो यह बताता है कि बाजार उससे ग्रोथ की ज़्यादा उम्मीदें लगा रहा है। ITC का ROCE (Return on Capital Employed) और ROE (Return on Equity) क्रमशः ~37% और ~29% है, जो Godfrey Phillips के ROCE ~26-35% और ROE ~20-27% से थोड़ा बेहतर है। यह ITC के कैपिटल की एफिशिएंट यूज़ को दिखाता है। 6 फरवरी को Sensex में 0.31% की गिरावट दर्ज की गई, जो यह बताता है कि टोबैको सेक्टर का यह उछाल काफी चुनिंदा था।

विश्लेषकों की राय और आगे की राह

जनवरी की गिरावट के बाद, कई विश्लेषकों ने ITC के लिए अपनी रेटिंग घटाई थी। लेकिन हाल ही में, 4 फरवरी 2026 को ITC के Mojo Score में 'Hold' रेटिंग के साथ थोड़ी नरमी आई है। ITC के लिए बाज़ार की आम सहमति (consensus) प्राइस टारगेट करीब ₹310 है, जो कुछ विश्लेषकों के अनुसार ज़्यादा बड़ी तेज़ी की गुंजाइश नहीं दिखाता। Godfrey Phillips के लिए स्पेसिफिक टारगेट प्राइस ज़्यादा सार्वजनिक नहीं हैं, पर कुछ संकेत सावधानी बरतने को कह रहे हैं। दोनों कंपनियों के लिए असली इम्तिहान यह होगा कि वे बढ़ी हुई कीमतों के बावजूद अपनी बिक्री की मात्रा (sales volume) को बनाए रख पाती हैं या नहीं। अगर ग्राहक बिना ज़्यादा मांग घटाए इन कीमतों को स्वीकार कर लेते हैं, तो शेयरों में आई यह तेज़ी टिकाऊ साबित हो सकती है। इसके विपरीत, अगर मांग में कोई भी बड़ी गिरावट आती है, तो कीमतों को बढ़ाने का फायदा खत्म हो जाएगा और नए टैक्स नियमों के तहत लाभप्रदता (profitability) को लेकर चिंताएं फिर बढ़ सकती हैं।

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