Titan Company के शेयरों में सोमवार को **2.78%** की जोरदार तेजी देखने को मिली। कंपनी ने शानदार तिमाही नतीजे पेश किए, जिसमें साल-दर-साल **63%** का मुनाफा बढ़ा है। यह तेजी ऐसे समय में आई है जब ग्लोबल एनर्जी की कीमतों और भू-राजनीतिक चिंताओं के चलते भारतीय बाजार में थोड़ी नरमी थी। Titan की ग्रोथ का मुख्य कारण ज्वैलरी सेगमेंट में शानदार प्रदर्शन रहा।
Titan के शेयरों में तूफानी तेजी, 2.78% ऊपर
सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में Titan Company के शेयरों ने कमाल दिखाया। कंपनी के शेयर 2.78% चढ़कर ₹5,122.20 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गए। यह तेजी कंपनी द्वारा जारी किए गए Q1 FY27 के नतीजों के बाद आई, जिसमें कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 63% की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई।
ज्वैलरी सेगमेंट बना ग्रोथ का इंजन
Titan के इस शानदार प्रदर्शन के पीछे इसके ज्वैलरी बिजनेस का बड़ा हाथ रहा। कंपनी के ज्वैलरी सेगमेंट (बुल्लियन और डिजिटल गोल्ड को छोड़कर) के रेवेन्यू में पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले 40% का इजाफा हुआ। यह मजबूत ग्रोथ ऐसे समय में आई है जब कंज्यूमर खर्च के पैटर्न पर बारीक नजर रखी जा रही है।
ग्लोबल चिंताओं का बाजार पर असर
एक तरफ जहां Titan के शेयर चढ़ रहे थे, वहीं दूसरी ओर निफ्टी 50 और सेंसेक्स जैसे प्रमुख भारतीय बेंचमार्क सपाट रहे। निवेशकों की सेंटिमेंट पर अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते तनाव और हॉरमज जलडमरूमध्य के आसपास संभावित व्यवधानों जैसी भू-राजनीतिक चिंताओं का असर दिखा। इन चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $85 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं, जिससे महंगाई और इकोनॉमी पर एनर्जी की बढ़ती कीमतों के असर को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
SBI में बिकवाली, Titan में तेजी
Titan के विपरीत, कुछ अन्य बड़ी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली देखी गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के शेयर लगभग 2% गिर गए, हालांकि बैंक ने Q1 में 10.23% का मुनाफा बढ़ाया था। ऐसा लगता है कि कुछ निवेशकों ने हालिया तेजी के बाद मुनाफावसूली करना पसंद किया।
आगे क्या?
भविष्य में, निवेशक कई बातों पर नजर रखेंगे। अमेरिकी कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़े का बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इससे फेडरल रिजर्व के अगले कदम का अंदाजा लगेगा, जो अक्सर भारत जैसे उभरते बाजारों में कैपिटल फ्लो को प्रभावित करता है। Titan के लिए, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव और रिटेल ज्वैलरी सेक्टर को प्रभावित करने वाले संभावित रेगुलेटरी बदलाव प्रमुख देखने लायक चीजें होंगी। सोने की ऊंची कीमतें अक्सर रिटेलर्स के लिए दोधारी तलवार साबित होती हैं, क्योंकि ये कभी-कभी कंज्यूमर डिमांड को कम कर सकती हैं।
