Telangana की वोटर लिस्ट में करीब **7.39 लाख** प्रविष्टियों को वेरिफिकेशन के लिए मार्क किया गया है, जो कुल मतदाताओं का लगभग **22%** है। इस भारी प्रशासनिक फेरबदल से जनता में भ्रम की स्थिति है, जिसे देखते हुए CM Revanth Reddy ने Election Commission से **4 हफ्ते** का एक्स्टेंशन मांगा है ताकि असली वोटरों के नाम लिस्ट से बाहर न हों।
वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पर उठ रहे सवाल
तेलंगाना में 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' (SIR) के तहत चुनावी रोल की जांच चल रही है, लेकिन यह प्रक्रिया अब प्रशासनिक अनिश्चितता में बदल गई है। करीब 7.39 लाख एंट्रीज को 'Absent, Shifted, Dead and Duplicate' (ASDD) कैटेगरी में डाल दिया गया है। आम जनता की शिकायत है कि वेरिफिकेशन के दौरान Aadhaar और PAN कार्ड जैसे वैलिड डॉक्यूमेंट्स को भी रिजेक्ट किया जा रहा है। कई जगहों पर अधिकारियों द्वारा दशकों पुराने दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जो आम नागरिकों के लिए जुटाना लगभग नामुमकिन है।
सियासी दखल और चिंताएं
इस संकट को देखते हुए मुख्यमंत्री Revanth Reddy ने चीफ इलेक्शन कमिश्नर को पत्र लिखा है। सरकार का कहना है कि प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और प्रशासनिक गलतियों के कारण कोई भी पात्र मतदाता मताधिकार से वंचित नहीं रहना चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने ही जिस तरह से अर्बन सेंटर्स में वोटर्स की संख्या में अचानक उतार-चढ़ाव देखा गया है, उस पर गंभीर चिंता जताई है।
कानूनी जोखिम और आगे की राह
यह पूरा मामला केवल चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि गवर्नेंस की दक्षता का भी टेस्ट है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि वेरिफिकेशन के दौरान गलत जानकारी देना Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) और Representation of the People Act, 1950 के तहत एक गंभीर आपराधिक अपराध है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या Election Commission राज्य सरकार की 4 हफ्ते की मांग को स्वीकार करेगा और क्या वेरिफिकेशन के लिए कोई आसान गाइडलाइंस जारी की जाएंगी।
