सुप्रीम कोर्ट ने मियापुर की **550 एकड़** जमीन को लेकर तेलंगाना सरकार के पक्ष में फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी अब इस बेशकीमती जमीन का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर और जनकल्याणकारी प्रोजेक्ट्स के लिए करेंगे, जिससे हैदराबाद के रियल एस्टेट बाजार में हलचल बढ़ गई है।
सुप्रीम कोर्ट ने मियापुर की 550 एकड़ प्राइम लैंड पर निजी दावों को खारिज कर 23 साल लंबी कानूनी लड़ाई का अंत कर दिया है। इस फैसले से तेलंगाना सरकार को ₹50,000 करोड़ की संपत्ति वापस मिल गई है। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने साफ किया है कि इस जमीन को मोनेटाइज (monetize) किया जाएगा ताकि सिंचाई, हेल्थकेयर और एजुकेशन प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जुटाया जा सके।
हैदराबाद रियल एस्टेट पर असर
हैदराबाद का पेरिफेरी इलाका लंबे समय से प्रॉपर्टी डेवलपमेंट का केंद्र रहा है। सरकार के पास इतनी बड़ी जमीन आने से इलाके में लैंड सप्लाई बढ़ सकती है। अगर सरकार इसे नीलाम करती है या लीज पर देती है, तो रियल एस्टेट डेवलपर्स के लिए नए मौके खुलेंगे, लेकिन यह हाल के वर्षों में बढ़ी जमीनों की कीमतों की तेजी पर लगाम भी लगा सकता है।
पॉलिटिकल रिस्क और सरकारी सख्ती
रेवंत रेड्डी सरकार अब पिछली BRS सरकार के दौरान हुए लैंड डील्स की भी गहन जांच कर रही है। सरकार का दावा है कि पिछले 3 वर्षों में उसने करीब ₹1.5 लाख करोड़ की सरकारी जमीन को कब्जे से मुक्त कराया है। हालांकि, इस तरह की सख्ती से उन कंपनियों के लिए रेगुलेटरी रिस्क बढ़ सकता है जिनकी जमीनें पिछली सरकार के कार्यकाल की डील्स से जुड़ी हैं।
निवेशकों के लिए क्या है खास?
अब निवेशकों की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार इस जमीन को मार्केट में कैसे उतारेगी। एक कैबिनेट सब-कमेटी इसके तौर-तरीकों पर काम कर रही है। भविष्य में होने वाली लैंड ऑक्शन और सरकारी टेंडर्स निवेशकों के लिए सबसे बड़े इंडिकेटर होंगे, जो तय करेंगे कि तेलंगाना के रियल एस्टेट सेक्टर की दिशा क्या होगी।
