Telangana सरकार ने राज्य के 10,954 गांवों में एक बड़ा लैंड रिसर्वे प्रोजेक्ट शुरू किया है। इस पहल के तहत सैटलाइट टेक्नोलॉजी और 'Bhudhaar' यूनिक आईडी के जरिए जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल बनाया जा रहा है, जिससे भविष्य में निवेश और जमीन के सौदों में पारदर्शिता आएगी।
Telangana सरकार ने राज्य भर में फैले 10,954 राजस्व गांवों को कवर करने वाला एक व्यापक तीन-चरणीय लैंड रिसर्वे प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को खत्म करने और मालिकाना हक के पक्के दस्तावेज तैयार करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव है। अब तक 285 गांवों में यह काम पूरा हो चुका है, और पहले चरण में 2,720 गांवों को प्राथमिकता दी जाएगी। सरकार ने अपनी मैपिंग क्षमता को बढ़ाने के लिए 400 अतिरिक्त ग्लोबल नेविगेशन सैटलाइट सिस्टम (GNSS) रोवर्स खरीदे हैं, जिससे अब कुल 811 यूनिट्स काम पर लगी हैं।
क्या है 'Bhudhaar' सिस्टम?
इस आधुनिकीकरण का सबसे मुख्य हिस्सा है हर जमीन के टुकड़े के लिए एक यूनिक 'Bhudhaar' नंबर जारी करना। जिस तरह नागरिकों के लिए Aadhaar नंबर होता है, उसी तरह यह नंबर जमीन की पहचान को एक डिजिटल आधार देगा। इसमें एक पब्लिक ऑब्जेक्शन पीरियड भी रखा गया है, ताकि रिकॉर्ड फाइनल होने से पहले जमीन मालिक अपनी जानकारी को वेरिफाई कर सकें।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
रियल एस्टेट और इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से जुड़े निवेशकों के लिए यह गेम-चेंजर साबित हो सकता है। भारत में जमीन अधिग्रहण और टाइटल वेरिफिकेशन सबसे चुनौतीपूर्ण काम है, जिसमें अक्सर विवादों के कारण प्रोजेक्ट्स अटक जाते हैं और लागत बढ़ जाती है। अगर यह डिजिटल रिकॉर्डिंग का काम सही तरीके से लागू होता है, तो कानूनी झमेले कम होंगे और कंपनियों के लिए जमीन का मालिकाना हक तय करना आसान हो जाएगा। हालांकि, इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि सरकार विवादों को कितनी तेजी से सुलझाती है और ऐतिहासिक डेटा को डिजिटल सिस्टम के साथ कैसे जोड़ती है।
