9 सितंबर, 2026 को तेलंगाना विधानसभा के स्पीकर ने विपक्ष के भारी हंगामे के बाद 22 BRS विधायकों को पूरे मानसून सत्र के लिए निलंबित कर दिया है।
बुधवार, 9 सितंबर 2026 को तेलंगाना विधानसभा में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब स्पीकर गद्दाम प्रसाद कुमार ने विपक्ष के 22 विधायकों को शेष मानसून सत्र के लिए सदन से बाहर का रास्ता दिखा दिया। यह कदम तब उठाया गया जब BRS के सदस्य कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा की मांग को लेकर सदन के वेल में आ गए थे।
क्यों हुआ इतना बड़ा विवाद?
विपक्ष का आरोप है कि राज्य में पुलिस का रवैया गलत रहा है, खासकर महिला पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ दुर्व्यवहार और पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव को मिल रही सुरक्षा धमकियों को लेकर पार्टी काफी आक्रामक थी। सदन में हंगामे के दौरान BRS के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामा राव भी मौजूद थे।
सरकार का क्या है रुख?
उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क और संसदीय मामलों के मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने विपक्ष पर सदन की कार्यवाही को जानबूझकर बाधित करने का आरोप लगाया। स्पीकर द्वारा बार-बार अनुशासन बनाए रखने की चेतावनी के बावजूद जब विधायक अपनी सीटों पर नहीं लौटे, तो सरकार ने उनके निलंबन का प्रस्ताव पेश कर दिया।
आगे क्या हो सकता है?
119 सदस्यों वाली विधानसभा में BRS के पास 37 सीटें हैं। अब 22 सदस्यों के निलंबन से विधानसभा का गणित पूरी तरह बदल गया है। BRS नेतृत्व ने अब राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला के पास जाकर अपनी शिकायत दर्ज कराने का फैसला किया है।
हालांकि यह घटना राज्य की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा रही है, लेकिन इसका असर शेयर बाजार (Nifty, Sensex) पर नहीं पड़ेगा। बाजार की चाल फिलहाल ग्लोबल मैक्रो-इकोनॉमिक फैक्टर्स और क्रूड ऑयल की कीमतों पर निर्भर है। निवेशकों को नजर रखनी होगी कि क्या यह गतिरोध राज्य के कामकाज में लंबे समय तक के लिए बाधा बनता है या नहीं।
