ITR फाइलिंग: छूटे हुए TCS क्रेडिट का ऐसे करें क्लेम, जानें पूरी प्रक्रिया

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AuthorMehul Desai|Published at:
ITR फाइलिंग: छूटे हुए TCS क्रेडिट का ऐसे करें क्लेम, जानें पूरी प्रक्रिया

अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करते समय टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) का क्लेम करना भूल गए हैं, तो घबराएं नहीं। आप रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करके इस छूटे हुए क्रेडिट को वापस पा सकते हैं। यह प्रक्रिया टैक्सपेयर्स को किसी भी गलती या चूक को ठीक करने का मौका देती है। लेकिन, रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने से पहले यह सुनिश्चित करना बहुत ज़रूरी है कि आपके टैक्स रिकॉर्ड्स आपके आधिकारिक दस्तावेज़ों से मेल खाते हों, ताकि आपका क्लेम रिजेक्ट न हो।

जिन टैक्सपेयर्स ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने के बाद यह पाया कि उन्होंने टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (TCS) क्रेडिट का क्लेम करना छोड़ दिया है, उनके पास इस गलती को सुधारने का मौका है। यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण है कि यह 'टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स' की बात हो रही है, जो खरीदार द्वारा विक्रेता को भुगतान किया जाने वाला एक टैक्स है जिसे विक्रेता वसूलता है। इसका IT कंपनी Tata Consultancy Services के फाइनेंशियल परफॉरमेंस या स्टॉक से कोई लेना-देना नहीं है। जिन लोगों ने असेसमेंट ईयर 2026-27 के लिए अपना रिटर्न फाइल किया है, वे अक्सर इन छूटे हुए क्रेडिट का दावा करने के लिए 'रिविज़्ड रिटर्न' (Revised Return) का उपयोग कर सकते हैं।

रिवाइज करने से पहले वेरिफिकेशन है ज़रूरी

रिविज़्ड रिटर्न फाइल करने से पहले, टैक्सपेयर्स को अपने टैक्स डेटा का पूरी तरह से मिलान करना होगा। इनकम टैक्स सिस्टम टैक्सपेयर के क्लेम और सरकारी आधिकारिक रिकॉर्ड के बीच डेटा मिलान पर निर्भर करता है। पहला कदम आधिकारिक इनकम टैक्स ई-फाइलिंग पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म 26AS और एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) को चेक करना है। इन दस्तावेज़ों में आपके पैन (PAN) के अगेंस्ट कलेक्ट किए गए या काटे गए टैक्स का आधिकारिक रिकॉर्ड होता है।

अगर TCS क्रेडिट इन दस्तावेज़ों में नहीं दिख रहा है, तो सिर्फ रिवाइज्ड रिटर्न फाइल करने से काम नहीं चलेगा। ऐसे मामलों में, टैक्सपेयर को 'कलेक्टर' यानी उस इकाई से संपर्क करना होगा जिसने टैक्स कलेक्ट किया था, जैसे बैंक या कोई विक्रेता, और उनसे फॉर्म 27EQ का उपयोग करके करेक्शन स्टेटमेंट फाइल करने का अनुरोध करना होगा। यदि कलेक्टर इन रिकॉर्ड्स को अपडेट नहीं करता है, तो टैक्स डिपार्टमेंट क्लेम को मान्यता नहीं दे सकता है, जिससे प्रोसेसिंग के दौरान मिसमैच और क्रेडिट रिजेक्शन हो सकता है।

रिवाइज्ड रिटर्न की प्रक्रिया

अगर डेटा फॉर्म 26AS और AIS में सही ढंग से दर्शाया गया है, लेकिन शुरुआती ITR फाइलिंग के दौरान छूट गया था, तो टैक्सपेयर इनकम-टैक्स एक्ट की धारा 139(5) के तहत रिवाइज्ड रिटर्न फाइल कर सकता है। यह मूल फाइलिंग का एक संशोधित संस्करण होता है। इस रिवाइज्ड रिटर्न को फाइल करने की विंडो आमतौर पर असेसमेंट ईयर के 31 दिसंबर को बंद हो जाती है। टैक्सपेयर्स को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे इसे अपडेटेड रिटर्न (ITR-U) के साथ भ्रमित न करें, क्योंकि अपडेटेड रिटर्न प्रक्रिया आम तौर पर रिफंड क्लेम बढ़ाने की अनुमति नहीं देती है।

संभावित जोखिम

यदि प्रक्रिया का सही ढंग से पालन नहीं किया जाता है, तो स्पष्ट जोखिम हैं। यदि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट द्वारा ओरिजिनल रिटर्न की प्रोसेसिंग या असेसमेंट रिवाइज्ड रिटर्न सबमिट होने से पहले पूरी हो जाती है, तो रिटर्न को रिवाइज करने का अवसर खो सकता है। इसके अलावा, समय पर करेक्शन स्टेटमेंट फाइल करने के लिए कलेक्टर पर निर्भरता एक बाहरी निर्भरता पैदा करती है। यदि कलेक्टर समय पर रिकॉर्ड अपडेट करने में विफल रहता है, तो टैक्स क्रेडिट का दावा करना मुश्किल हो सकता है। निवेशकों और टैक्सपेयर्स को इन समस्याओं से बचने के लिए साल भर नियमित रूप से अपने AIS की निगरानी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, बजाय इसके कि वे टैक्स फाइलिंग साइकिल के अंत तक प्रतीक्षा करें।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.