Tata Trusts: बड़े इस्तीफे की खबर! विजय सिंह ने छोड़ा सर रतन टाटा ट्रस्ट, अंदरूनी कलह की बू

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tata Trusts: बड़े इस्तीफे की खबर! विजय सिंह ने छोड़ा सर रतन टाटा ट्रस्ट, अंदरूनी कलह की बू

टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन, विजय सिंह, ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 14 अगस्त को समाप्त होने वाला था, लेकिन उन्होंने समय से पहले ही पद छोड़ दिया है। यह इस्तीफा ट्रस्ट की अंदरूनी कलह और महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर द्वारा ट्रस्ट की मीटिंग्स पर लगाई गई रोक के बीच आया है। इस रोक से चैरिटेबल कामों के लिए फंड बांटने में देरी हो सकती है और 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की AGM में ट्रस्ट की भागीदारी पर भी सवाल खड़े हो सकते हैं।

क्या है इस्तीफे की वजह?

विजय सिंह, जो टाटा ट्रस्ट्स के वाइस चेयरमैन हैं, ने सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) के ट्रस्टी पद से इस्तीफा दे दिया है। उनका कार्यकाल 14 अगस्त, 2026 को खत्म हो रहा था, लेकिन उन्होंने दोबारा नियुक्ति न पाने का फैसला किया है। हालांकि, सिंह अगले एक साल तक सर…

अंदरूनी खींचतान और नियम-कानून

यह इस्तीफा ट्रस्टियों के बीच नेतृत्व नियुक्ति के मानदंडों को लेकर चल रहे बड़े मतभेदों के बाद आया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस बात को लेकर अंदरूनी खींचतान है कि क्या नियुक्त किए गए सदस्य 1923 के ट्रस्ट डीड की शर्तों का सख्ती से पालन करते हैं। इन शर्तों में ट्रस्टियों का पारसी जारथुस्त्र (Parsi Zoroastrian) होना और मुंबई का स्थायी निवासी होना शामिल है। पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री जैसे लोगों को लेकर ये योग्यता संबंधी चिंताएं अब बोर्ड की आंतरिक चर्चाओं से आगे बढ़कर रेगुलेटरी जांच का विषय बन गई हैं।

मीटिंग पर रोक का असर

टाटा ग्रुप पर नजर रखने वालों के लिए, चिंता सिर्फ इस्तीफे की नहीं, बल्कि ट्रस्ट के आसपास चल रहे ऑपरेशनल गतिरोध की है। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने वर्तमान में SRTT को कोई भी मीटिंग करने से रोक दिया है। यह रोक नवाजभाई शेयर्स के ट्रांसफर और परमानेंट ट्रस्टियों की नियुक्ति से संबंधित कानूनी शिकायतों के समाधान लंबित रहने तक लागू है।

चैरिटी और कॉरपोरेट पर असर

मीटिंग पर लगी इस रोक का असर चैरिटेबल और कॉरपोरेट, दोनों तरह की गतिविधियों पर पड़ रहा है। ट्रस्टियों के अनुसार, मीटिंग न हो पाने की स्थिति में लगभग ₹400 करोड़ के चैरिटेबल वितरण की योजना खतरे में पड़ सकती है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि यह कॉर्पोरेट जगत के लिए सवाल खड़ा करता है कि शेयरधारक के तौर पर ट्रस्ट की परिचालन क्षमता क्या होगी। सर रतन टाटा ट्रस्ट, टाटा संस में एक महत्वपूर्ण शेयरधारक है। टाटा संस वह होल्डिंग कंपनी है जो टाटा ग्रुप की प्रमुख परिचालन कंपनियों, जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, टाटा मोटर्स और टाटा स्टील का प्रबंधन करती है।

टाटा संस की AGM पर अनिश्चितता

18 अगस्त, 2026 को टाटा संस की एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) तय है, ऐसे में ट्रस्ट की मीटिंग्स पर लगी रेगुलेटरी रोक यह अनिश्चितता पैदा करती है कि ट्रस्ट शेयरधारक के निर्णयों को कैसे संभालेगा। हालांकि टाटा ग्रुप की परिचालन कंपनियां अपने पेशेवर प्रबंधन के साथ स्वतंत्र रूप से काम करती हैं, लेकिन ट्रस्ट का आंतरिक गवर्नेंस विवाद एक महत्वपूर्ण पृष्ठभूमि कारक बना हुआ है। ग्रुप को ट्रैक करने वाले निवेशक संभवतः महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर से अपडेट का इंतजार करेंगे, क्योंकि मीटिंग प्रतिबंधों का समाधान यह निर्धारित करेगा कि क्या ट्रस्ट आगामी कॉर्पोरेट गवर्नेंस मामलों में प्रभावी ढंग से भाग ले सकेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.