Noel Tata की लीडरशिप में Tata Trusts अपनी रणनीति बदल रहा है। अब संस्था केवल ग्रांट देने के बजाय सीधे तौर पर हेल्थकेयर और एजुकेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी। इसका लक्ष्य देशभर में **50** नॉट-फॉर-प्रॉफिट अस्पताल खड़ा करना है, जो Tata Group के लिए एक बड़ा बदलाव है क्योंकि ट्रस्ट ही Tata Sons का सबसे बड़ा शेयरधारक है।
नई राह पर Tata Trusts
Noel Tata की कमान संभालते ही Tata Trusts ने अपने काम करने के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। अभी तक ट्रस्ट मुख्य रूप से बाहरी संस्थाओं को फंड (ग्रांट) देने का काम करता था, लेकिन अब यह संस्था खुद बड़े इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को बनाने और मैनेज करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। फोकस मुख्य रूप से भारत की हेल्थकेयर और एजुकेशन व्यवस्था में मौजूद कमियों को दूर करने पर है।
निवेशकों के लिए क्या हैं मायने?
Tata Trusts, Tata Sons का मुख्य शेयरधारक है। चूँकि समूह की कंपनियों से मिलने वाला डिविडेंड ही ट्रस्ट की फिलैंथ्रॉपी गतिविधियों का मुख्य जरिया है, इसलिए इस बदलाव का असर ग्रुप की वित्तीय स्थिरता पर पड़ सकता है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि बड़े स्तर पर अस्पताल बनाने की यह योजना ट्रस्ट की लिक्विडिटी और भविष्य में मिलने वाले डिविडेंड्स पर क्या असर डालेगी।
हेल्थकेयर में बड़ा विस्तार
ट्रस्ट की सबसे बड़ी योजना 40 से 50 नॉट-फॉर-प्रॉफिट अस्पताल खोलने की है। इनका उद्देश्य उन इलाकों में इलाज की सुविधा पहुँचाना है जहाँ मेडिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर की भारी कमी है। इन प्रोजेक्ट्स को Tata Memorial Hospital और IISc जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मानकों पर तैयार किया जाएगा ताकि वे सेल्फ-सस्टेनिंग (आत्मनिर्भर) बन सकें।
वित्तीय स्थिति का लेखा-जोखा
फाइनेंशियल ईयर 2026 के आंकड़ों पर नजर डालें तो ट्रस्ट ने कुल ₹1,556 करोड़ खर्च किए थे। इसमें से ₹1,353 करोड़ संस्थागत ग्रांट्स के लिए और ₹203 करोड़ व्यक्तिगत सहायता के लिए दिए गए थे। अब यह पैसा ग्रांट्स के बजाय सीधे प्रोजेक्ट्स की लागत में जाने की उम्मीद है।
आने वाले समय में बाजार की नजर इस बात पर होगी कि इन अस्पतालों के निर्माण में कितनी तेजी आती है और ट्रस्ट किस तरह से अपने कैपिटल को मैनेज करता है।
