महाराष्ट्र के धर्मादाय आयुक्त (Charity Commissioner) ने टाटा ट्रस्ट्स से मेहली मिस्त्री को हटाने से जुड़ी सुनवाई को **8 सितंबर** तक के लिए टाल दिया है। ट्रस्ट्स की ओर से मिस्त्री की औपचारिक आपत्तियों पर जवाब देने के लिए अधिक समय मांगने के बाद यह फैसला लिया गया है।
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महाराष्ट्र के धर्मादाय आयुक्त (Charity Commissioner) ने टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी मेहली मिस्त्री को हटाने से संबंधित सुनवाई को 8 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दिया है। यह देरी तब हुई जब संस्था ने मिस्त्री की उन आपत्तियों पर जवाब देने के लिए छह हफ्तों की मोहलत मांगी, जो उनकी भूमिका की समाप्ति को दर्ज करने के लिए फाइल की गई 'चेंज रिपोर्ट' के खिलाफ थीं।
यह मामला सर रतन टाटा ट्रस्ट के ट्रस्टी के रूप में मिस्त्री के कार्यकाल के समाप्त होने से उपजा है, जो 2025 के अंत में खत्म हुआ था। मिस्त्री ने इस कदम को चुनौती दी है, उनका आरोप है कि उनके कार्यकाल को समाप्त करने का निर्णय मनमाना था और रतन टाटा के निधन के बाद गवर्नेंस में स्थिरता सुनिश्चित करने के पिछले प्रस्तावों के विपरीत था। उनकी आपत्तियों में आंतरिक गवर्नेंस प्रथाओं की व्यापक समीक्षा और ट्रस्टी मामलों की निगरानी के लिए एक स्वतंत्र प्रशासक की नियुक्ति की संभावना का अनुरोध शामिल है।
जबकि ये कार्यवाही चल रही है, संस्था अपने गवर्नेंस ढांचे के संबंध में कई कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही है। इसमें नवजबाई रतन टाटा ट्रस्ट से शेयर ट्रांसफर से जुड़ा एक अलग, लंबे समय से चला आ रहा विवाद भी शामिल है। इन कानूनी और नियामकीय बाधाओं ने धर्मार्थ संस्था के प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर सार्वजनिक ध्यान आकर्षित किया है।
कानूनी कार्यवाही के बावजूद, टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ सिद्धार्थ शर्मा ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि संस्था का मुख्य ध्यान उसके परोपकारी मिशन पर बना हुआ है। हाल की टिप्पणियों में, शर्मा ने बताया कि ट्रस्टों ने 2025-26 के फाइनेंशियल ईयर के दौरान विभिन्न धर्मार्थ पहलों पर लगभग ₹1,600 करोड़ खर्च किए। संस्था ने चालू फाइनेंशियल ईयर के लिए इस धर्मार्थ व्यय को ₹2,000 करोड़ तक बढ़ाने की भी योजना बनाई है, और चल रहे कानूनी विवादों को अपने मुख्य सामाजिक कल्याण उद्देश्यों से इतर बताया है।
इस स्थिति पर नज़र रखने वाले पर्यवेक्षकों के लिए, अगली महत्वपूर्ण जानकारी 8 सितंबर को महाराष्ट्र के धर्मादाय आयुक्त के समक्ष निर्धारित कार्यवाही होगी। निवेशक और हितधारक संभवतः इस बात पर नज़र रखेंगे कि क्या आगामी सुनवाई विवादित गवर्नेंस प्रक्रियाओं पर स्पष्टता प्रदान करती है या ट्रस्ट के प्रशासनिक और शेयर ट्रांसफर मामलों के आसपास कानूनी जांच जारी रहती है।
