Tata Sons IPO: टाटा ट्रस्ट्स में मचा घमासान, क्या शेयर बाजार में लिस्ट होगी दिग्गज कंपनी?

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AuthorAditya Rao|Published at:
Tata Sons IPO: टाटा ट्रस्ट्स में मचा घमासान, क्या शेयर बाजार में लिस्ट होगी दिग्गज कंपनी?

Tata Trusts के भीतर बोर्ड लेवल पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। टाटा संस (Tata Sons) को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के मुद्दे पर ट्रस्टी दो गुटों में बंट गए हैं। दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा कंपनी की कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) का दर्जा सरेंडर करने की अर्जी खारिज होने के बाद यह पूरा संकट गहरा गया है।

भारत के $277 बिलियन के इस विशालकाय बिजनेस ग्रुप में अंदरूनी कलह तेज हो गई है। टाटा ट्रस्ट्स, जो टाटा संस की लगभग 66% हिस्सेदारी संभालता है, के भीतर नेतृत्व और कंपनी की भविष्य की दिशा को लेकर भारी मतभेद सामने आए हैं।

विवाद की जड़ क्या है?

यह पूरा ड्रामा तब शुरू हुआ जब RBI ने टाटा संस को अपनी कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी (CIC) के रूप में काम बंद करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके चलते टाटा संस अब 'अपर-लेयर' NBFC की श्रेणी में आ गई है, जिसके कड़े नियमों के तहत कंपनी का शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य हो सकता है।

ट्रस्टियों के बीच की खींचतान

एक तरफ नोएल टाटा, नेविल टाटा, डेरियस खंबाटा और भास्कर भट्ट जैसे ट्रस्टी कंपनी के निजी स्वरूप को बनाए रखने के पक्ष में हैं, तो दूसरी तरफ वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह जैसे दिग्गजों पर नियमों के पालन का दबाव है। ट्रस्टियों का तर्क है कि ग्रुप का मूल उद्देश्य एक प्राइवेट एंटिटी के रूप में बने रहना है।

क्या है कंपनी का प्लान B?

IPO से बचने के लिए टाटा संस ने एक पुनर्गठन (Restructuring) योजना पर विचार किया है। इसके तहत टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम सॉल्यूशंस और टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को टाटा संस में विलय करने की तैयारी है ताकि कंपनी का इनकम स्ट्रक्चर बदला जा सके। हालांकि, इस फैसले को लेकर भी ट्रस्ट के भीतर सहमति नहीं बन पाई है, जिससे गवर्नेंस पर सवाल उठ रहे हैं।

भविष्य के लिए क्या हैं जोखिम?

इस विवाद ने केवल लिस्टिंग ही नहीं, बल्कि लीडरशिप की स्थिरता पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर भी ट्रस्ट्स में असंतोष की खबरें हैं। निवेशक अब इस बात पर नजर गड़ाए हुए हैं कि क्या यह ग्रुप RBI के नियमों और आंतरिक विवादों को सुलझा पाएगा या मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंचेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.