Tata Trusts ने चैरिटी कमिश्नर के सामने Mehli Mistry की कानूनी स्थिति को चुनौती दी है। ट्रस्ट का कहना है कि Mistry का कार्यकाल अक्टूबर **2025** में ही खत्म हो चुका है, जिससे उनकी शिकायतों का कोई आधार नहीं बचता।
कानूनी विवाद की जड़
Tata Trusts ने एक कड़ा कदम उठाते हुए Mehli Mistry की एडमिनिस्ट्रेटिव मामलों में दखलंदाजी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। Sir Dorabji Tata Trust और Bai Hirabai Jamestji Tata Navsari Charitable Institution ने चैरिटी कमिश्नर के पास हलफनामा दायर कर कहा है कि Mistry का 3 साल का कार्यकाल 28 अक्टूबर 2025 को समाप्त हो गया था। ट्रस्ट का मानना है कि अब उनके पास गवर्नेंस के मामलों में हस्तक्षेप करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है।
बोर्ड अपॉइंटमेंट और पुराने नियम
यह कानूनी लड़ाई केवल Mistry की स्थिति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें 1923 के ट्रस्ट डीड (Trust Deed) के नियमों की भी चर्चा हो रही है। इस डीड के तहत ट्रस्टियों का मुंबई या नवसारी का निवासी होना और पारसी धर्म का पालन करना अनिवार्य है। वर्तमान में Bai Hirabai Trust, विजय सिंह के इस्तीफे के बाद Noel Tata को नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। Mistry ने इन नियुक्तियों की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं, जबकि ट्रस्ट नियमों के अनुपालन का दावा कर रहा है। इसके अलावा, 15 मई के एक आदेश के चलते Sir Ratan Tata Trust की मीटिंग्स पर लगी रोक ने कामकाज को और जटिल बना दिया है।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
Tata Trusts, Tata Sons में एक बड़ी हिस्सेदारी रखते हैं, जो Tata Group की होल्डिंग कंपनी है। हालांकि यह मामला चैरिटी कमिश्नर के अधीन है, लेकिन ट्रस्ट की गवर्नेंस में कोई भी अस्थिरता ग्रुप के नेतृत्व और भविष्य के फैसलों पर अनिश्चितता का बादल ला सकती है। फिलहाल बाजार की नजरें इस बात पर हैं कि चैरिटी कमिश्नर Mistry की कानूनी स्थिति पर क्या फैसला लेते हैं।
