Shapoorji Pallonji (SP) Group और Tata Sons के बीच **18.37%** हिस्सेदारी को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद सुलझने की राह पर है। दोनों पक्ष एक संभावित शेयर स्वैप (Share Swap) पर चर्चा कर रहे हैं, जिससे SP Group को अपनी लिस्टेड टाटा कंपनियों में हिस्सेदारी के बदले अनलिस्टेड Tata Sons के शेयर मिल सकते हैं। यह SP Group को अपना कर्ज कम करने में मदद करेगा। हालांकि, वैल्यूएशन को लेकर मतभेद एक बड़ी बाधा बने हुए हैं।
क्या है शेयर स्वैप का प्लान?
Shapoorji Pallonji (SP) Group और Tata Sons के बीच लंबे समय से चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर आ गया है। दोनों पक्ष 18.37% हिस्सेदारी के मुद्दे को सुलझाने के लिए फिर से बातचीत कर रहे हैं। SP Group, जो Tata Sons में अनलिस्टेड शेयर रखती है, अब इन शेयरों को लिस्टेड टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों से बदलने की योजना बना रही है।
इसका मुख्य मकसद SP Group को अपने बड़े कर्ज को चुकाने में मदद करना है। SP Group पर करीब ₹60,000 करोड़ का कर्ज है। इस शेयर स्वैप के जरिए, SP Group को लिस्टेड कंपनियों के शेयर मिलेंगे, जिन्हें बेचकर या मैनेज करके वे अपना कर्ज कम कर सकेंगे। यह Tata Sons के लिए भी फायदेमंद है क्योंकि इससे उन्हें सीधे तौर पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
कर्ज चुकाने का दबाव और समय सीमा
SP Group अपने बैलेंस शीट को मजबूत करने के दबाव में है। हाल की खबरों के अनुसार, ग्रुप ने अपने Tata Sons के स्टेक के बदले बॉन्ड के जरिए लगभग ₹21,500 करोड़ के रीफाइनेंसिंग के लिए एग्रीमेंट भी कर लिया है। इस डील के पूरा होने की उम्मीद 20 जुलाई, 2026 तक है। इन रीफाइनेंसिंग एग्रीमेंट्स में कुछ शर्तें भी शामिल हैं, जिनमें Tata Sons की पब्लिक लिस्टिंग या स्टेक का सेटलमेंट जरूरी है। इसलिए, दोनों पक्षों के लिए जल्द से जल्द एक समाधान निकालना महत्वपूर्ण हो गया है।
वैल्यूएशन का पेंच और आगे की राह
इस बातचीत की सबसे बड़ी बाधा दोनों पक्षों के बीच वैल्यूएशन को लेकर भारी अंतर है। Tata Group की 16 लिस्टेड कंपनियां हैं, जिनकी बाजार में तय कीमत है। लेकिन Tata Sons अनलिस्टेड होने के कारण, उसके शेयरों का सही मूल्य तय करना मुश्किल हो रहा है। हाल के अनुमानों के मुताबिक, Tata Group की लिस्टेड कंपनियों की कुल मार्केट कैप लगभग ₹25.28 लाख करोड़ है, जिसमें Tata Sons की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी है।
इसके अलावा, Tata Sons के भविष्य को लेकर भी दोनों के विचार अलग हैं। SP Group जहां IPO के जरिए वैल्यू अनलॉक करना चाहता है, वहीं Tata Trusts के चेयरमैन Noel Tata जैसे लोग इसके विरोध में बताए जा रहे हैं।
निवेशकों को इस मामले पर नजर रखनी चाहिए कि क्या दोनों पक्ष वैल्यूएशन पर सहमति बना पाते हैं और यह शेयर स्वैप प्रमुख लिस्टेड टाटा कंपनियों की शेयरहोल्डिंग पर क्या असर डालता है। SP Group की रीफाइनेंसिंग डील की समय सीमा खत्म होने से पहले क्या दोनों समूह कोई फाइनल सेटलमेंट कर पाते हैं, यह देखना अहम होगा।
