Tata Group Share Price: चेयरमैन चंद्रशेखरन 2027 में छोड़ेंगे पद, शेयरों में घबराहट

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Tata Group Share Price: चेयरमैन चंद्रशेखरन 2027 में छोड़ेंगे पद, शेयरों में घबराहट

टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने कहा है कि वे अपना तीसरा कार्यकाल नहीं चाहेंगे, जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त होगा। इस खबर के बाद 12 अगस्त 2026 को बाजार में बिकवाली का दबाव देखा गया। उनके नेतृत्व में ग्रुप का मार्केट वैल्यू 3.3 गुना बढ़ा, लेकिन कंज्यूमर ब्रांड्स चमके जबकि IT दिग्गज निफ्टी 50 इंडेक्स से पिछड़ गए।

टाटा ग्रुप के शेयरों में उथल-पुथल

12 अगस्त 2026 को टाटा ग्रुप के निवेशकों ने काफी उतार-चढ़ाव देखा। इसकी वजह यह खबर रही कि टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अपना वर्तमान कार्यकाल, जो 20 फरवरी 2027 को खत्म हो रहा है, उसके बाद नया कार्यकाल नहीं चाहेंगे। इस घोषणा के बाद ग्रुप के कई शेयरों में तुरंत बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बाजार में लीडरशिप ट्रांजीशन और इस विशाल समूह की भविष्य की रणनीति को लेकर अनिश्चितता देखी जा रही है।

एक दशक के मिले-जुले नतीजे

एन. चंद्रशेखरन, जिनका कार्यकाल फरवरी 2017 में शुरू हुआ था, उनके नेतृत्व में टाटा ग्रुप का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन लगभग 3.3 गुना बढ़कर करीब ₹26-27 ट्रिलियन तक पहुंच गया। हालांकि, जब इस ग्रोथ की तुलना व्यापक बाजार से की जाती है, तो ग्रुप की लिस्टेड कंपनियों ने मिले-जुले नतीजे दिखाए हैं। ग्रुप का ओवरऑल मार्केट कैप सालाना 12.4% की दर से बढ़ा है, जो समान अवधि में निफ्टी 50 के 13.2% के प्रदर्शन से थोड़ा पीछे है। इसका मतलब है कि भले ही संपत्ति में बड़ी वृद्धि हुई हो, लेकिन उनके कार्यकाल में ग्रुप बेंचमार्क इंडेक्स को पीछे नहीं छोड़ पाया।

कंज्यूमर सेगमेंट की चमक, IT की सुस्ती

ग्रुप के प्रदर्शन में अलग-अलग बिजनेस सेगमेंट के बीच एक स्पष्ट विभाजन देखने को मिलता है। कंज्यूमर-फेसिंग कंपनियां वैल्यू बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाई हैं। Trent और Titan ने शानदार ग्रोथ दिखाई है, खासकर Trent के मार्केट कैपिटलाइजेशन में सालाना 30% से अधिक की कंपाउंड ग्रोथ देखी गई है। Tata Consumer Products ने भी रिटेल और लाइफस्टाइल सेगमेंट में मजबूत मांग का फायदा उठाते हुए सकारात्मक योगदान दिया है।

इसके विपरीत, Tata Consultancy Services (TCS) जैसी दिग्गज कंपनियों का प्रदर्शन ग्रुप के ओवरऑल इंडेक्स-बीटिंग पोटेंशियल को धीमा कर रहा है। TCS, जो चंद्रशेखरन के शुरुआती नेतृत्व का एक अहम हिस्सा था, उसने मार्केट कैप में मामूली ग्रोथ दिखाई है। यह पिछड़न काफी हद तक ग्लोबल IT सर्विसेज सेक्टर में चल रही चुनौतियों से जुड़ी है, जहां कंपनियों को टेक्नोलॉजी खर्च में सावधानी और जेनेरेटिव AI टूल्स को अपनाने को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

जोखिम और भविष्य के लिए अहम बातें

अब निवेशक दो तरह की चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। पहला, लीडरशिप सक्सेशन से जुड़ा जोखिम। भारत के सबसे बड़े समूहों में से एक के तौर पर, रणनीति की निरंतरता महत्वपूर्ण है, और बाजार अक्सर शीर्ष प्रबंधन में बदलाव को लेकर अनिश्चितता पसंद नहीं करता।

दूसरा, वैल्यूएशन का जोखिम। ग्रुप के कई स्टार परफॉर्मर्स, खासकर रिटेल सेगमेंट में, हाई प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) मल्टीपल पर ट्रेड कर रहे हैं। यदि अर्निंग ग्रोथ इन ऊंचे वैल्यूएशन के साथ तालमेल नहीं बिठा पाती है, तो इन शेयरों में करेक्शन का दबाव आ सकता है। इसके अतिरिक्त, IT सेगमेंट की रिकवरी वैश्विक मांग पर निर्भर है, जिसमें अभी तक कोई मजबूत तेजी नहीं दिखी है। भविष्य में, निवेशक टाटा संस के लिए सक्सेशन प्लान पर करीब से नजर रखेंगे और यह भी देखेंगे कि क्या ग्रुप अपने कंज्यूमर व्यवसायों की गति बनाए रख सकता है, साथ ही अपने पुराने IT और मैन्युफैक्चरिंग डिवीजनों के लिए नए ग्रोथ इंजन ढूंढ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.