सुप्रीम कोर्ट ने कच्छ की खाड़ी से जुड़े पर्यावरणीय मामले में Tata Chemicals के खिलाफ होने वाली दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है। हालांकि, कोर्ट ने नए सिरे से इम्पैक्ट असेसमेंट (Impact Assessment) के आदेश दिए हैं, जिससे कंपनी की पुरानी देनदारियों को लेकर निवेशकों की चिंता अभी बरकरार है।
कानूनी राहत और कोर्ट के निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Tata Chemicals को बड़ी राहत देते हुए कच्छ की खाड़ी में पर्यावरणीय नुकसान से जुड़े मामले में जबरन कार्रवाई पर रोक लगा दी है। चीफ जस्टिस सूर्या कांत की अगुवाई वाली बेंच ने गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड को आदेश दिया है कि वे स्वतंत्र विशेषज्ञों की एक टीम नियुक्त करें। यह टीम पर्यावरण को हुए नुकसान का आकलन करेगी और तय करेगी कि इसके लिए कंपनी पर कितना हर्जाना या मुआवजा लगाया जा सकता है।
विवाद की जड़ क्या है?
यह मामला मिठापुर प्लांट से निकलने वाले वेस्टवॉटर (Wastewater) डिस्चार्ज से जुड़ा है। मई 2026 में गुजरात हाईकोर्ट ने कंपनी के खिलाफ फैसला सुनाया था और जमीन के उपयोग को मैरीन सेंचुरी के नियमों का उल्लंघन बताया था। इस फैसले के बाद से ही कंपनी पर बड़े वित्तीय और नियामक जोखिम बने हुए थे।
निवेशकों के लिए क्या है संकेत?
कंपनी ने अपनी सफाई में कहा है कि उन्होंने अब आधुनिक 'क्लोज्ड डीप-सी डिस्चार्ज पाइपलाइन' अपना ली है, इसलिए कानूनी लड़ाई मुख्य रूप से पुरानी कार्यप्रणाली पर केंद्रित है। निवेशकों के लिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि वे असेसमेंट रिपोर्ट का इंतजार करें। गुजरात सरकार को 2 नवंबर तक अपना जवाब दाखिल करना है और विशेषज्ञों की रिपोर्ट अगले 3 महीनों में आने की उम्मीद है।
शेयर का हाल
बाजार में कानूनी अनिश्चितता का असर साफ दिख रहा है। साल 2026 में कंपनी का शेयर करीब 18% टूट चुका है, जबकि बीते 12 महीनों में इसमें 33% से ज्यादा की गिरावट आई है। फिलहाल यह स्टॉक कानूनी दांव-पेच और बाजार की अस्थिरता के बीच दबाव में ट्रेड कर रहा है।
