तमिलनाडु सरकार ने 6 अक्टूबर को होने वाले धारापुरम उपचुनाव से ठीक पहले वेलफेयर स्कीमों का दायरा बढ़ा दिया है। इनमें मुफ्त बिजली और फ्री बस यात्रा जैसी योजनाएं शामिल हैं, जो राज्य के बजट और फिस्कल अनुशासन पर सीधा असर डाल सकती हैं।
मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 6 अक्टूबर के उपचुनाव को देखते हुए वेलफेयर स्कीमों को रफ्तार दी है। इन फैसलों के तहत मिडिल स्कूल के छात्रों के लिए ब्रेकफास्ट प्रोग्राम का विस्तार, 200 यूनिट मुफ्त बिजली और 2 अक्टूबर से मुफ्त बस यात्रा की सौगात दी गई है। इसके अलावा, राज्य ने शैक्षणिक और धार्मिक स्थलों के पास 700 से ज्यादा शराब की दुकानें बंद करने का भी बड़ा फैसला लिया है।
निवेशकों के लिए क्यों है यह जरूरी?
इकोनॉमिक्स के नजरिए से देखें तो इन स्कीमों का असर राज्य के रेवेन्यू डेफिसिट और फिस्कल फ्लेक्सिबिलिटी पर पड़ना तय है। जब सरकार सब्सिडी पर भारी खर्च करती है, तो अक्सर कैपिटल एक्सपेंडिचर के लिए फंड कम पड़ जाता है, जो लॉन्ग-टर्म इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के लिए जरूरी होता है। बाजार के जानकारों की नजर अब इस बात पर है कि सरकार अपने Debt-to-GSDP रेशियो को कैसे मैनेज करती है।
पॉलिटिकल और फाइनेंशियल कनेक्शन
यह उपचुनाव तमिलनाडु की पॉलिसी दिशा तय करने में एक सेंटीमेंट इंडिकेटर का काम करेगा। विपक्षी दलों जैसे DMK और AIADMK के साथ चल रही राजनीतिक उठापटक के बीच, निवेशकों को आने वाले फाइनेंशियल रिपोर्ट्स और बजट रिव्यूज पर खास नजर रखनी चाहिए। चुनाव के बाद का फिस्कल असेसमेंट ही यह स्पष्ट करेगा कि इन स्कीमों का कुल बोझ कितना है और सरकार भविष्य में अपनी कैपेक्स स्ट्रेटजी (Capex Strategy) में क्या बदलाव करती है।
