Tamil Nadu School Meals: बच्चों के खाने में चिकन बिरयानी? राज्य सरकार कर रही है विचार

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AuthorNeha Patil|Published at:
Tamil Nadu School Meals: बच्चों के खाने में चिकन बिरयानी? राज्य सरकार कर रही है विचार

तमिलनाडु सरकार स्कूलों में बच्चों के मिड-डे मील (Mid-Day Meal) में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी शामिल करने के प्रस्ताव पर विचार कर रही है। इस कदम का मकसद बच्चों के पोषण स्तर को सुधारना और स्कूल आने वाले बच्चों की संख्या बढ़ाना है।

स्कूल पोषण योजना का नया प्लान

तमिलनाडु सरकार एक बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। राज्य के स्कूलों में चलने वाली मिड-डे मील (Mid-Day Meal) योजना के मेन्यू में हफ्ते में एक बार चिकन बिरयानी को शामिल किया जा सकता है। स्कूल शिक्षा मंत्री के. राजमोहन ने इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के सामने पेश किया है।

पौष्टिक भोजन का लंबा इतिहास

तमिलनाडु में स्कूल पोषण कार्यक्रमों का एक लंबा इतिहास रहा है। राज्य की मिड-डे मील योजना को पूरे भारत के लिए एक मॉडल माना जाता है। यह योजना 1950 के दशक में के. कामराज के समय से चली आ रही है और समय के साथ इसमें कई बदलाव हुए हैं। एम. करुणानिधि, एम.जी. रामचंद्रन और जे. जयललिता जैसे नेताओं के कार्यकाल में अंडे जैसी चीजें मेन्यू में जोड़ी गईं ताकि बच्चों को ज्यादा प्रोटीन मिल सके।

इसके अलावा, सितंबर 2022 में तमिलनाडु सरकार ने मुख्यमंत्री नाश्ता योजना (Chief Minister's Breakfast Scheme) शुरू की, जिसे अब 'पेरुंथलाइवर कामराज नाश्ता योजना' के नाम से जाना जाता है। यह योजना प्राइमरी स्कूल के बच्चों को एक अतिरिक्त पौष्टिक भोजन मुहैया कराती है। इन पहलों का मकसद बच्चों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना और हर तबके के बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रोत्साहित करना है।

पैसों और व्यवस्था पर विचार

हालांकि चिकन बिरयानी का प्रस्ताव विचाराधीन है, लेकिन इसे अभी तक मुख्यमंत्री के दफ्तर से अंतिम मंजूरी नहीं मिली है। इस फैसले में सबसे अहम भूमिका 'ऑपरेशनल कॉस्ट' यानी संचालन की लागत की होगी। फिलहाल, स्कूल भोजन योजना के लिए प्रति छात्र प्रतिदिन लगभग ₹15 का बजट है। मांसाहारी व्यंजन जोड़ने पर खरीद, भंडारण और खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखने के लिए प्रति छात्र खर्च की मौजूदा सीमा की समीक्षा करनी पड़ सकती है।

इस खास प्रस्ताव के अलावा, राज्य सरकार छात्रों के लिए नाश्ते के मेन्यू में भी और विविधता लाने की योजना बना रही है। खाद्य और सप्लाई चेन सेक्टर में निवेशकों और हितधारकों के लिए मुख्य बात यह होगी कि सरकार की ओर से कोई नया टेंडर या नीतिगत बदलाव आता है या नहीं, जिससे राज्य में पोल्ट्री और संबंधित सामग्री की खरीद बढ़ सके। अंतिम फैसला इन पोषण संबंधी लक्ष्यों और राज्य के कल्याणकारी खर्चों के बजट के बीच संतुलन पर निर्भर करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.