TVS Group के दिग्गजों, वेणु श्रीनिवासन, मल्लिका श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु के बीच एसेट बंटवारे को लेकर कानूनी खींचतान शुरू हो गई है। चेन्नई कोर्ट में क्रॉस-केविएट दाखिल होने से हलचल है, ताकि कोई भी पक्ष बिना सुनवाई के एकतरफा ऑर्डर न ले सके।
TVS ग्रुप के प्रमुख औद्योगिक परिवार के सदस्यों के बीच एसेट बंटवारे को लेकर विवाद गहरा गया है। 12 अक्टूबर को चेन्नई कोर्ट में औद्योगिक घराने के वेणु श्रीनिवासन, मल्लिका श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु की ओर से क्रॉस-केविएट दाखिल की गई हैं। कानूनी भाषा में 'केविएट' का मतलब है कि कोर्ट किसी भी मामले में सुनवाई से पहले संबंधित पक्ष को सुने बिना कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं करेगा। इस कदम से सभी पक्षों ने सुनिश्चित किया है कि वे कानूनी प्रक्रिया में पूरी तरह सुरक्षित रहें।
विवाद की जड़ क्या है?
यह सारा विवाद 2024 में हस्ताक्षरित एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) को लेकर है। सूत्रों के मुताबिक, लक्ष्मी वेणु एसेट के मालिकाना हक और गवर्नेंस को स्पष्ट करने के लिए अधिक औपचारिक समाधान चाहती हैं। वहीं, दूसरी ओर वेणु श्रीनिवासन और उनके बेटे सुदर्शन वेणु का मानना है कि 2024 का MoU पहले ही एक बाइंडिंग फ्रेमवर्क है। इसी डॉक्यूमेंट की व्याख्या को लेकर दोनों पक्षों में असहमति है, जो इस गतिरोध का मुख्य कारण बनी है।
निवेशकों पर क्या होगा असर?
बाजार के जानकारों के लिए किसी भी बड़े इंडस्ट्रियल ग्रुप में गवर्नेंस का मसला बेहद अहम होता है। TVS ग्रुप का इतिहास हमेशा से प्रोफेशनल मैनेजमेंट के लिए जाना जाता रहा है, विशेषकर 2020 के पारिवारिक बंटवारे के बाद से। अब निवेशकों की नजर इस बात पर है कि क्या यह अंदरूनी कलह TVS Motor Company, Sundaram-Clayton या TAFE जैसी कंपनियों की ऑपरेशनल स्टेबिलिटी और भविष्य की रणनीतियों को प्रभावित करेगी।
सुलह की राह
हालांकि कोर्ट में मामला पहुंचने से तनाव दिख रहा है, लेकिन मल्लिका श्रीनिवासन और लक्ष्मी वेणु के प्रतिनिधियों ने संकेत दिए हैं कि वे लंबी कानूनी लड़ाई के बजाय बातचीत के जरिए मसला सुलझाना पसंद करेंगे। उन्हें उम्मीद है कि 2020 के बंटवारे की तरह ही इस बार भी आपसी सहमति बन सकती है। फिलहाल, वेणु श्रीनिवासन ने इस मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी है, और बाजार की नजर अब इस बात पर टिकी है कि परिवार आपसी मतभेदों को कितनी जल्दी खत्म करता है।
