Tamizhaga Vettri Kazhagam (TVK) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि तमिलनाडु में DMK के इशारे पर वोटर लिस्ट से **97 लाख** (9.7 मिलियन) मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। पार्टी का दावा है कि इस हस्तक्षेप ने पूरी चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
TVK के जनरल सेक्रेटरी आरव अर्जुन ने सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू कर दी है। पार्टी का आरोप है कि 'स्पेशल इंटेंसिव रिविजन' के दौरान DMK ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया, जिससे राज्य की वोटर लिस्ट से 97 लाख नाम गायब हो गए।
गंभीर आरोप और डेटा का खेल
TVK का कहना है कि इस प्रक्रिया में खास तौर पर महिलाओं और 30 साल से कम उम्र के युवाओं को निशाना बनाया गया। आरोप है कि बूथ-लेवल अधिकारियों पर दबाव डालकर और स्थानीय सत्ताधारी नेताओं के संरक्षण में यह पूरी धांधली की गई। इतना ही नहीं, पार्टी ने यह भी दावा किया है कि एक प्राइवेट एंटिटी (निजी कंपनी) के जरिए चुनाव आयोग और सरकारी डेटा का इस्तेमाल किया गया, जिसे एक प्राइवेट ऐप में इंटीग्रेट कर वोटर्स के व्यवहार पर नजर रखी जा रही थी।
राजनीतिक हलचल और आगे की राह
इससे पहले AIADMK नेता एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने भी इसी तरह की चिंताएं जाहिर की थीं। हालांकि DMK ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है, लेकिन TVK ने सुप्रीम कोर्ट में दस्तावेजी सबूत पेश करने की बात कही है।
इन्वेस्टर्स और बाजार के जानकारों के लिए यह मामला इसलिए अहम है क्योंकि राज्य की राजनीति में स्थिरता और प्रशासनिक निष्पक्षता का सीधा असर नीतिगत फैसलों पर पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाले समय में तमिलनाडु की पॉलिटिकल और रेगुलेटरी दिशा तय करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
