Tamil Nadu सरकार ने Srivilliputhur-Meghamalai Tiger Reserve से हजारों लोगों को बेदखल करने के सुप्रीम कोर्ट के मई 2026 के आदेश के खिलाफ समीक्षा याचिका दायर करने का फैसला किया है। फिलहाल बेदखली की कार्रवाई को रोक दिया गया है, जो **5,000 हेक्टेयर** से अधिक भूमि से जुड़ी है।
तमिलनाडु सरकार ने Srivilliputhur-Meghamalai Tiger Reserve में निवासियों को हटाने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है। 29 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य को 4,601 अतिक्रमणों को हटाने का निर्देश दिया था, जो कुल 5,072.653 हेक्टेयर में फैले हैं। अगस्त 2026 में, प्रशासन ने पुष्टि की है कि कानूनी समीक्षा होने तक कोई बेदखली नहीं होगी।
विवाद की जड़: Forest Rights Act (FRA)
इस पूरे मामले के केंद्र में 2006 का Forest Rights Act है। All India Kisan Sabha और अन्य संगठनों ने तर्क दिया है कि सरकार ने बेदखली से पहले वनवासियों के अधिकारों का सत्यापन नहीं किया है। कानून के मुताबिक, विस्थापन से पहले इन अधिकारों को मान्यता देना अनिवार्य है।
निवेशकों और कॉर्पोरेट के लिए सबक
यह मामला भारत में जमीन अधिग्रहण से जुड़े Regulatory और Social जोखिमों को दर्शाता है। आज के समय में इंफ्रास्ट्रक्चर, माइनिंग और एनर्जी जैसे प्रोजेक्ट्स के लिए ESG (Environmental, Social, and Governance) मानक बेहद महत्वपूर्ण हैं। यदि सरकारी नीतियां और संवैधानिक अधिकार (FRA) आपस में टकराते हैं, तो इससे प्रोजेक्ट्स में देरी और कानूनी अनिश्चितता बढ़ सकती है। निवेशकों के लिए ऐसी घटनाओं पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि यह भारत में निवेश के लिए रेगुलेटरी माहौल की स्पष्टता को प्रभावित करती हैं।
