तमिलनाडु सरकार मुख्यमंत्री के दफ्तर को शिफ्ट करने के लिए ₹5.54 करोड़ के एक टेंडर को लेकर पहले बड़े राजनीतिक विवाद में फंस गई है। विपक्षी दलों ने प्रक्रियात्मक खामियों और निर्माण की समय-सीमा पर चिंता जताई है, जबकि राज्य प्रशासन ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है और तकनीकी खामियों को इसका कारण बताया है।
तमिलनाडु में नवगठित सरकार, जिसके मुखिया तमिलगा வெற்றிKazhagam (TVK) के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय हैं, एक बड़े भ्रष्टाचार विवाद का सामना कर रही है। यह मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) को फोर्ट सेंट जॉर्ज स्थित वर्तमान परिसर से नमक्कल कविनगर मालियाई भवन में स्थानांतरित करने के लिए जारी किए गए ₹5.54 करोड़ के टेंडर से जुड़ा है।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सहित विपक्षी दलों ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर प्रक्रियात्मक चिंताओं को उजागर किया है। मुख्य आरोप यह है कि औपचारिक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही नए ऑफिस स्पेस के निर्माण कार्य शुरू हो गए थे। इसके अलावा, आलोचकों ने टेंडर के दस्तावेजों में विसंगतियों की ओर इशारा किया है, जिसमें ऑनलाइन ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर प्रोजेक्ट की वैल्यू शुरू में 'NA' (लागू नहीं) दिखाई गई थी, जबकि प्रिंट विज्ञापनों में ₹5.54 करोड़ की विशिष्ट लागत बताई गई थी।
सार्वजनिक निर्माण मंत्री आदव अर्जुन ने राज्य विधानसभा में इन आरोपों का जवाब देते हुए घोटाले के दावों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उठाई गई समस्याएं केवल तकनीकी खामियां थीं, न कि जानबूझकर की गई अनियमितताएं। सरकार के अनुसार, अभी तक काम के लिए कोई अनुबंध (contract) नहीं दिया गया है, और न ही इस प्रोजेक्ट पर कोई सार्वजनिक धन खर्च किया गया है। प्रशासन ने इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह एक कार्यात्मक आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान ऑफिस का स्थान मुख्यमंत्री के कर्मचारियों की बढ़ती मांगों और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अपर्याप्त है।
लगभग 100 दिनों के कार्यकाल में, राज्य प्रशासन के लिए इस विवाद का प्रबंधन करना उसकी प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षा है। सरकार ने पिछले पांच वर्षों में लोक निर्माण और राजमार्ग विभागों में टेंडर विकास के संबंध में एक विस्तृत श्वेत पत्र (white paper) जारी करने की योजना की घोषणा करके स्थिति को स्पष्ट करने का प्रयास किया है। इस कदम का उद्देश्य सार्वजनिक खरीद प्रक्रियाओं के बारे में व्यापक चिंताओं को दूर करना है।
जनता और पर्यवेक्षकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य पहलू इस श्वेत पत्र का जारी होना और उसके बाद टेंडर प्रक्रिया का प्रबंधन होगा। सरकारी प्रक्रियाओं के पालन और अपनी खरीद में पारदर्शिता बनाए रखने की सरकार की क्षमता वर्तमान राजनीतिक विवाद को हल करने और परियोजना के निष्पादन को बिना किसी और देरी के सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगी।
