तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने विपक्ष DMK पर 'EMI-स्टाइल' में वसूली का रैकेट चलाने का आरोप लगाया है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के दस्तावेजों का हवाला देते हुए CM ने इसे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स में एक बड़ी धांधली बताया है, जिससे राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को लेकर अनिश्चितता बढ़ सकती है।
विधानसभा के पटल पर सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने विपक्षी पार्टी Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) के खिलाफ भ्रष्टाचार के सनसनीखेज खुलासे किए। मुख्यमंत्री ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) के दस्तावेजों का सहारा लेते हुए दावा किया कि पिछली सरकार के दौरान कॉन्ट्रैक्टर्स से कमीशन लेने का एक पूरा सिस्टम बना लिया गया था।
क्या है 'EMI-स्टाइल' वसूली का आरोप?
मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य की परियोजनाओं में काम करने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स को जबरन 'पार्टी फंड' के नाम पर रिश्वत देने को मजबूर किया जाता था। उन्होंने इसे 'EMI-स्टाइल' कलेक्शन कहा है, क्योंकि यह पैसा कर्ज की किस्तों की तरह नियमित अंतराल पर वसूला जाता था। आरोपों के अनुसार, वेंडर्स से कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 7.5% से लेकर 10% तक हिस्सा कमीशन के तौर पर लिया जाता था।
ये कथित भ्रष्टाचार मुख्य रूप से Municipal Administration and Water Supply (MAWS) विभाग और सरकारी शराब निगम TASMAC के प्रोजेक्ट्स से जुड़े बताए जा रहे हैं।
निवेश और गवर्नेंस पर असर (Impact on Business)
तमिलनाडु में काम करने वाली कंपनियों और निवेशकों के लिए यह राजनीतिक घमासान गवर्नेंस रिस्क बढ़ा सकता है। जब सरकार और विपक्ष प्रोक्योरमेंट प्रोसेस पर आमने-सामने होते हैं, तो टेंडर और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप की प्रक्रिया में देरी हो सकती है। ऐसी राजनीतिक खींचतान से प्रोजेक्ट अप्रूवल और पेमेंट प्रोसेसिंग की रफ्तार धीमी होने की आशंका बनी रहती है, जिससे सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स पर काम करने वाली कंपनियों को चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
मुख्य नेताओं का नाम
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में पूर्व मुख्यमंत्री M.K. Stalin, उपमुख्यमंत्री Udhayanidhi Stalin और पूर्व मंत्री V. Senthil Balaji का सीधे तौर पर जिक्र किया है। उन्होंने Sarkaria Commission का उदाहरण देते हुए इस पूरे मामले को शासन की एक पुरानी समस्या बताया है। फिलहाल, राज्य में राजनीतिक गतिरोध बढ़ने के आसार हैं और निवेशकों की नजर अब विधानसभा की कार्यवाही और जांच एजेंसियों के अगले कदमों पर टिकी है।
