तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेता साकेत गोखले ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पत्र लिखकर एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के गिरते स्वास्थ्य के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है। वांगचुक NEET और CBSE परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में अनिश्चितकालीन अनशन पर हैं और मंत्री के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। यह स्थिति राष्ट्रीय परीक्षा प्रबंधन और जवाबदेही को लेकर चल रहे तनाव को उजागर करती है।
सोनम वांगचुक की सेहत पर TMC का बड़ा बयान
तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता साकेत गोखले ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को एक औपचारिक पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर गहरी चिंता जताई है। वांगचुक, जो 28 जून, 2026 से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट) और CBSE (सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन) परीक्षाओं के प्रबंधन में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं।
गोखले ने अपने पत्र में स्पष्ट किया है कि वांगचुक की सेहत बिगड़ने की किसी भी स्थिति के लिए केंद्र सरकार को जवाबदेह ठहराया जाएगा। एक्टिविस्ट का यह विरोध 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा आयोजित एक बड़े आंदोलन का हिस्सा है, जो मंत्री प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन महत्वपूर्ण परीक्षाओं के लगातार कुप्रबंधन ने देश भर के लाखों छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया है।
विरोध प्रदर्शन की वर्तमान स्थिति और स्वास्थ्य चिंताएं
साकेत गोखले के अनुसार, वांगचुक की सेहत बेहद गंभीर हालत में है। बताया जा रहा है कि एक्टिविस्ट ने काफी वजन खो दिया है और उन्हें लगातार मेडिकल निगरानी की जरूरत पड़ रही है। विरोध प्रदर्शन कर रहे समूहों का दावा है कि हालिया परीक्षा घोटालों से जुड़ी प्रणालीगत समस्याओं ने अत्यधिक तनाव पैदा किया है, जिसे वे 12 छात्रों द्वारा की गई आत्महत्याओं से जोड़ रहे हैं।
TMC नेता ने शिक्षा मंत्रालय द्वारा किसी भी तरह की प्रतिक्रिया न मिलने की आलोचना की है। उन्होंने इस चुप्पी को 'लोकतांत्रिक जवाबदेही की विफलता' बताया। गोखले का मानना है कि इतनी बड़ी प्रशासनिक खामियों के बाद मंत्री को नैतिक आधार पर इस्तीफा दे देना चाहिए। TMC ने इस मुद्दे पर सक्रिय रूप से अपना समर्थन जताया है, जिसमें ममता बनर्जी और महुआ मोइत्रा जैसे पार्टी नेताओं ने कथित तौर पर विरोध प्रदर्शन स्थल का दौरा किया है और आंदोलन से जुड़े लोगों से मुलाकात की है।
आगे की निगरानी और संदर्भ
निवेशक और अन्य हितधारक इस स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहे हैं। यह मामला व्यापक शासन संबंधी चिंताओं और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसियों की प्रशासनिक स्थिरता को दर्शाता है। मंत्री के इस्तीफे की मांग अभी भी विवाद का मुख्य बिंदु बनी हुई है। जनता और अन्य हितधारकों के लिए मुख्य निगरानी योग्य बात यह होगी कि क्या शिक्षा मंत्रालय इन चिंताओं को दूर करने के लिए प्रदर्शनकारियों के साथ औपचारिक बातचीत शुरू करता है, या यह गतिरोध परीक्षा निकायों के संचालन और सार्वजनिक धारणा को प्रभावित करता रहता है।
