6 अक्टूबर को होने वाले उपचुनाव में Trinamool Congress के दो गुट आपस में भिड़ रहे हैं। पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर अधिकार की लड़ाई Election Commission में लंबित है, जिससे विपक्ष के वोटों के बंटवारे का खतरा पैदा हो गया है।
चुनावी मैदान में दो फाड़
6 अक्टूबर, 2026 को नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव एक अनोखी राजनीतिक जंग के गवाह बनेंगे। पहली बार Trinamool Congress के दो गुट अलग-अलग उम्मीदवार उतार रहे हैं, जिससे यह मुकाबला अब केवल चुनावी नहीं बल्कि राजनीतिक वैधता की सीधी लड़ाई बन गया है।
प्रमुख उम्मीदवार और मुकाबला
पार्टी के आधिकारिक गुट ने नंदीग्राम से संचिता प्रधान (डे) और रेजीनगर से रबीउल आलम चौधरी को मैदान में उतारा है। वहीं, रितव्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने नंदीग्राम से मोहम्मद एहतेशामुल हक और रेजीनगर से सफीउद्दीन शेख को टिकट दिया है। इस सीधा टकराव ने चुनावी माहौल को पूरी तरह बदल दिया है।
चुनाव आयोग की भूमिका
विवाद का केंद्र पार्टी का नाम, संपत्ति और 'जोड़ा घास-फूल' चुनाव चिह्न है। मामला फिलहाल Election Commission के पास है। यह उपचुनाव इस बात का लिटमस टेस्ट होगा कि जनता का असली समर्थन किस गुट के साथ है।
राजनीतिक समीकरण पर असर
हालांकि इसका सीधा असर शेयर बाजार पर नहीं है, लेकिन स्थानीय राजनीति पर इसका गहरा प्रभाव पड़ रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि इस आंतरिक कलह से Bharatiya Janata Party को फायदा हो सकता है, क्योंकि विपक्ष के वोट आपस में ही बंट जाएंगे। भविष्य की दिशा Election Commission के उस फैसले से तय होगी, जो पार्टी की कानूनी स्थिति और चुनाव चिह्न पर लिया जाएगा।
