पिछले हफ्ते भारतीय शेयर बाज़ार में जबरदस्त रौनक दिखी। टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों का मार्केट कैप कुल मिलाकर **₹1.54 लाख करोड़** बढ़ा है। इसमें सबसे बड़ा योगदान टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का रहा, जिसके दमदार नतीजों ने बाज़ार में जोश भर दिया। वहीं, BSE Sensex और NSE Nifty में भी बढ़त दर्ज की गई, जो निवेशकों का भरोसा दिखाती है।
TCS के दम पर बाज़ार में उछाल
पिछले हफ्ते भारतीय इक्विटी बाज़ार ने शानदार प्रदर्शन किया। टॉप 10 सबसे मूल्यवान कंपनियों में से पाँच ने मिलकर अपने मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में कुल ₹1.54 लाख करोड़ का इज़ाफ़ा किया। इस बढ़ोतरी की वजह BSE Sensex का 0.75% और NSE Nifty का 0.52% बढ़ना रहा। घरेलू आर्थिक विकास को लेकर सकारात्मक माहौल के चलते निवेशकों ने लार्ज-कैप स्टॉक्स में फिर से दिलचस्पी दिखाई।
TCS के नतीजों ने दिलाई बड़ी लीड
इस बाज़ार की तेज़ी में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) का सबसे बड़ा हाथ रहा। कंपनी ने अपनी लेटेस्ट तिमाही रिपोर्ट के बाद अपने मार्केट वैल्यू में ₹72,072.3 करोड़ का इजाफ़ा किया, जिससे इसका कुल मार्केट कैप ₹8,20,672.70 करोड़ तक पहुँच गया। TCS ने जून 2026 को समाप्त तिमाही में ₹13,349 करोड़ का नेट प्रॉफिट दर्ज किया, जो पिछली तिमाही से 4.61% ज़्यादा है। मैनेजमेंट का कहना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव का बिज़नेस पर असर आने वाले महीनों में कम होने की उम्मीद है।
फाइनेंशियल और कॉर्पोरेट दिग्गजों का भी योगदान
आईटी सेक्टर के अलावा, बड़े फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस और कंपनियों ने भी इस हफ्ते की बढ़त में अहम भूमिका निभाई। ICICI Bank के मार्केट वैल्यू में ₹29,062.06 करोड़ का इजाफ़ा हुआ। इसके बाद Reliance Industries का नंबर आया, जिसकी मार्केट कैप ₹23,884.93 करोड़ बढ़ी। Bajaj Finance और State Bank of India ने भी क्रमशः ₹21,946.5 करोड़ और ₹7,338.34 करोड़ का फायदा दर्ज किया। यह दिखाता है कि डोमेस्टिक इंटरेस्ट रेट्स के स्थिर रहने की उम्मीद के बीच निवेशकों का झुकाव बड़ी फाइनेंशियल सर्विस कंपनियों की ओर बढ़ा है।
कुछ कंपनियों के वैल्यूएशन में गिरावट
जहां कई बड़ी कंपनियों ने अच्छा प्रदर्शन किया, वहीं कुछ कंपनियों को नुकसान भी झेलना पड़ा। Larsen & Toubro के मार्केट वैल्यू में सबसे ज़्यादा ₹18,097.72 करोड़ की कमी आई। Life Insurance Corporation of India (LIC) का वैल्यूएशन ₹12,080.75 करोड़ घटा। Bharti Airtel, HDFC Bank, और Hindustan Unilever जैसी कंपनियों को भी लगभग ₹1,221 करोड़ से लेकर ₹7,706 करोड़ तक का नुकसान हुआ। यह गिरावट दर्शाती है कि बाज़ार के सकारात्मक रुझान के बावजूद, कंपनियों का प्रदर्शन उनके तिमाही नतीजों और सेक्टर-स्पेशफिक डिमांड के आधार पर अलग-अलग रहा।
आगे चलकर निवेशक इस बात पर नज़र रखेंगे कि आईटी सेक्टर विदेशी बाज़ारों में संभावित डिमांड में उतार-चढ़ाव का सामना कैसे करता है। यह देखना भी अहम होगा कि TCS अपने नए बिजनेस से जुड़े मार्जिन प्रदर्शन को बनाए रख पाता है या नहीं, और फाइनेंशियल सेक्टर आने वाले महीनों में क्रेडिट साइकल और रेगुलेटरी अपडेट्स के बीच अपनी वैल्यूएशन बढ़त को कैसे बरकरार रखता है।
