Swiggy के शेयरों में आज **5%** की शानदार तेजी देखने को मिली। यह उछाल शेयरहोल्डर्स द्वारा **49.5%** विदेशी स्वामित्व की सीमा को मंजूरी देने के बाद आया है, जिससे 'इंडियन ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी' (IOCC) का रास्ता साफ हो गया है। ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने **₹435** के टारगेट के साथ 'Buy' रेटिंग दी है।
Swiggy में तूफानी तेजी का राज
20 अगस्त को Swiggy के शेयरों में इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान करीब 5% का उछाल देखा गया। बाजार इस खबर पर रिएक्ट कर रहा था कि ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म Jefferies ने कंपनी पर 'Buy' रेटिंग के साथ कवरेज शुरू की है और ₹435 का टारगेट प्राइस सेट किया है। यह लक्ष्य मौजूदा क्लोजिंग स्तरों से काफी अच्छी बढ़त का संकेत देता है।
IOCC स्टेटस से क्या होगा?
शेयरों में इस तेजी की मुख्य वजह कंपनी का एक बड़ा रणनीतिक फैसला है। 18 अगस्त को, Swiggy के शेयरधारकों ने कुल विदेशी स्वामित्व को 49.5% तक सीमित रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। यह कदम कंपनी के लिए 'इंडियन ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी' (IOCC) का दर्जा पाने के लिए बेहद जरूरी है। यह स्टेटस खासकर कंपनी के क्विक-कॉमर्स वर्टिकल Instamart के भविष्य के संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
मार्जिन में सुधार और लागत में कटौती
IOCC का दर्जा मिलने से Swiggy को अपनी Instamart सर्विस को 'फर्स्ट-पार्टी' यानी इन्वेंट्री-लेड बिजनेस मॉडल में बदलने की सुविधा मिलेगी। अभी तक, कंपनी अपनी सप्लाई चेन के लिए अक्सर बिचौलियों पर निर्भर रहती है। सीधे इन्वेंट्री का मालिक बनकर, Swiggy उन बिचौलियों को दिए जाने वाले मार्जिन को कम कर सकेगी। Jefferies के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि इस स्ट्रक्चरल बदलाव से प्रॉफिट मार्जिन में लगभग 80 बेसिस पॉइंट का सुधार हो सकता है।
बड़े रिस्क पर भी नजर
हालांकि, IOCC स्टेटस में बदलाव कुछ खास जोखिम भी पैदा करता है जिन पर शेयरधारकों को गौर करना चाहिए। एनालिस्ट्स ने चेतावनी दी है कि स्वामित्व संरचना में बदलाव के कारण Swiggy को MSCI और FTSE जैसे प्रमुख ग्लोबल स्टॉक मार्केट इंडेक्स से बाहर किया जा सकता है। यदि ऐसा होता है, तो इन इंडेक्स को ट्रैक करने वाले पैसिव इन्वेस्टमेंट फंड्स को अपनी होल्डिंग्स बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है। अनुमान है कि इससे $400 मिलियन से अधिक का पैसिव आउटफ्लो हो सकता है, जो बदलाव के बाद के हफ्तों में स्टॉक पर सेलिंग प्रेशर बना सकता है।
आगे क्या?
इंडेक्स के जोखिम के अलावा, ऑपरेशनल बदलाव पर भी बारीकी से नजर रखने की जरूरत होगी। इन्वेंट्री-लेड मॉडल को अपनाना पूंजी-गहन (Capital-intensive) है। इसमें कंपनी को वर्किंग कैपिटल और इन्वेंट्री मैनेजमेंट में अधिक निवेश करने की आवश्यकता होगी। सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि Swiggy इन बढ़ी हुई लागतों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करते हुए उच्च सेवा स्तर बनाए रख पाती है या नहीं। क्विक-कॉमर्स सेक्टर में कड़ी प्रतिस्पर्धा है, और प्रतिद्वंद्वी भी लागत को ऑप्टिमाइज़ करने और डिलीवरी एफिशिएंसी में सुधार करने के लिए आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं।
निवेशक कंपनी की प्रगति को तीन मुख्य मोर्चों पर ट्रैक कर सकते हैं: IOCC स्टेटस को लागू करने की आधिकारिक समय-सीमा, ग्लोबल इंडेक्स प्रोवाइडर्स से स्टॉक के शामिल होने या बाहर होने के संबंध में कोई भी आधिकारिक घोषणा, और Instamart का फाइनेंशियल परफॉरमेंस जैसे-जैसे यह नया इन्वेंट्री-लेड मॉडल रोल आउट करना शुरू करता है। ये डेवलपमेंट आने वाली तिमाहियों में कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी और मार्केट सेंटिमेंट को आकार देंगे।
