बोर्ड विस्तार और IOCC लक्ष्य पर झटका
Swiggy की बोर्ड का विस्तार करने और 'इंडियन ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी' (IOCC) बनने की कोशिशों को शेयरधारकों से बड़ा झटका लगा है। कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन (AoA) में बदलाव का एक अहम प्रस्ताव 75% की ज़रूरी वोटिंग प्रतिशत से पीछे रह गया, जिसे केवल 72.4% वोट ही मिले। इस नतीजे के चलते चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर (CFO) राहुल बोथरा और सह-संस्थापक फणी किशन अद्दापल्ली की डायरेक्टर्स के तौर पर नियुक्ति रुक गई है, जो इस संशोधन के सफल होने पर 1 जून 2026 से प्रभावी होने वाली थी।
गवर्नेंस बदलावों पर शेयरधारकों की असहमति
Swiggy के नवंबर 2024 में पब्लिक लिस्टिंग के बाद यह पहला मौका है जब शेयरधारकों ने किसी प्रस्ताव का खुलकर विरोध किया है। यह प्रस्तावित बदलाव IOCC स्टेटस के लिए कंपनी की गवर्नेंस को भारतीय विदेशी मुद्रा नियमों के अनुरूप लाने के Swiggy के लक्ष्य के लिए महत्वपूर्ण थे। IOCC स्टेटस हासिल करना, खासकर इसके क्विक कॉमर्स यूनिट Instamart के लिए, बेहद ज़रूरी है क्योंकि इससे इन्वेंट्री, प्राइवेट लेबल सोर्सिंग और मार्जिन कंट्रोल में ज़्यादा फ्लेक्सिबिलिटी आ सकती है। इस वोट के खारिज होने से संकेत मिलता है कि निवेशकों की गवर्नेंस बदलावों पर राय अलग-अलग है। कुछ प्रॉक्सी एडवाइजर्स और संस्थागत शेयरधारकों को संस्थापक श्रीहर्ष मजेटी के प्रभाव के ज़्यादा बढ़ने की चिंता है।
IOCC नियम और निवेशक का बारीक अवलोकन
भारत के फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA) के तहत IOCC का मतलब है कि कंपनी का मालिकाना हक और प्रभावी नियंत्रण भारतीय निवासियों या संस्थाओं के पास हो। यह सिर्फ शेयरहोल्डिंग से आगे बढ़कर बोर्ड की संरचना और नॉमिनेशन अधिकारों तक फैला हुआ है। हालांकि, नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर रेनन डी कास्त्रो अल्वेस पिंटो की नियुक्ति के लिए एक अलग वोट 98.98% समर्थन के साथ पास हो गया, लेकिन AoA संशोधन की विफलता कॉर्पोरेट नियंत्रण में बड़े बदलावों पर निवेशकों के सतर्क रुख को दर्शाती है। जानकारों का मानना है कि निवेशकों ने इन गवर्नेंस बदलावों को महज़ नियमित रेगुलेटरी कदम न मानकर, बारीकी से जांच की।
शेयरहोल्डर मिक्स और भविष्य की योजनाएं
Swiggy के शेयरहोल्डर्स में बड़ी संख्या में फंड्स (87.57%) और रिटेल निवेशक (मार्च 2026 तक के अनुसार लगभग 60-72%) शामिल हैं। विदेशी संस्थागत निवेशकों की हिस्सेदारी 14.59% और घरेलू संस्थागत निवेशकों की 1.94% है। Accel और SoftBank जैसे बड़े निवेशकों की हिस्सेदारी उन स्तरों से नीचे है जो पहले उन्हें बोर्ड में नॉमिनेशन की अनुमति देते थे। इस असफलता के बावजूद, Swiggy ने कहा है कि वह IOCC ट्रांज़िशन के लिए प्रतिबद्ध है और शेयरधारकों के साथ बातचीत जारी रखेगा। कंपनी ने FY26 के लिए ₹4,154 करोड़ का घाटा रिपोर्ट किया, हालांकि 31 मार्च 2026 को समाप्त तिमाही के लिए नेट लॉस घटकर ₹800 करोड़ रह गया। इस तिमाही में फूड डिलीवरी रेवेन्यू 27.4% और क्विक कॉमर्स रेवेन्यू 53% बढ़ा।
