गवर्नेंस में बड़े बदलाव अटके
Swiggy का 'इंडियन ओन्ड एंड कंट्रोल्ड कंपनी' (IOCC) बनने का रास्ता मुश्किल हो गया है। कंपनी के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन में बदलाव के प्रस्ताव को शेयरधारकों ने वोटिंग में पास नहीं किया। इस प्रस्ताव को 75% वोट की ज़रूरत थी, जो कि घटकर 72.35% रह गया। इस नतीज़े का मतलब है कि कंपनी की गवर्नेंस में वो जरूरी बदलाव नहीं हो पाएंगे, जिन्हें मैनेजमेंट आगे की प्लानिंग के लिए अहम मान रहा था। इतना ही नहीं, चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर राहुल बोथरा और को-फाउंडर फणी किशन को बोर्ड में शामिल करने के प्रस्ताव भी गिर गए। इससे साफ है कि निवेशक कंपनी की मौजूदा गवर्नेंस दिशा से खुश नहीं हैं।
Instamart की रणनीति पर असर
भारत के क्विक कॉमर्स मार्केट में आगे बढ़ने के लिए IOCC स्टेटस Swiggy के लिए काफी जरूरी था। भारत के फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) नियमों के तहत, विदेशी मालिकाना हक़ वाली कंपनियों को इन्वेंट्री रखने और सप्लाई चेन को सीधे कंट्रोल करने में दिक्कतें आती हैं। वहीं, Zomato का Blinkit जैसे कॉम्पटीटर्स इन्वेंट्री-लेड मॉडल अपनाकर अपने मार्जिन सुधार रहे हैं और प्राइवेट-लेबल प्रोडक्ट्स बढ़ा रहे हैं। IOCC स्टेटस के बिना, Swiggy सिर्फ एक मार्केटप्लेस मॉडल तक सीमित रहेगी, जिससे उसे अपने राइवल की तरह ऑपरेशनल एफिशिएंसी और यूनिट इकोनॉमिक्स हासिल करने में मुश्किल होगी।
निवेशकों की चिंताएं बढ़ीं
निवेशक Swiggy की आक्रामक ग्रोथ स्ट्रेटेजी और उसके फाइनेंशियल नतीजों को लेकर सवाल उठा रहे हैं। FY26 में कंपनी का रेवेन्यू 45% बढ़कर ₹23,053 करोड़ हो गया, लेकिन कंपनी को भारी नुकसान हो रहा है। पिछले तिमाही में ही ₹800 करोड़ का घाटा दर्ज किया गया। इसकी तुलना में Zomato इस फाइनेंशियल ईयर में प्रॉफिट में आ चुकी है, जिसने संस्थागत निवेशकों के भरोसे को हिला दिया है। एनालिस्ट्स का मानना है कि Zomato की एफिशिएंसी से पिछड़ने की वजह से Swiggy के शेयर के प्रदर्शन पर नवंबर 2024 में हुए डेब्यू के बाद से असर पड़ा है। डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स, जिनमें म्यूचुअल फंड्स भी शामिल हैं, लगातार विस्तार के बजाय प्रॉफिट कमाने के स्पष्ट रास्तों की तलाश में हैं। बोर्ड मेंबर्स की नियुक्ति का प्रस्ताव गिरना, मैनेजमेंट की इन रेगुलेटरी और कॉम्पिटिटिव चुनौतियों से निपटने की क्षमता पर विश्वास की कमी को दर्शाता है।
आगे का रास्ता
Swiggy का मैनेजमेंट शेयरधारकों की चिंताओं को दूर करने और भविष्य की स्ट्रेटेजी पर फिर से विचार करने के लिए उनसे बातचीत करने की योजना बना रहा है। हालांकि, कंपनी को हाइपरलोकल डिलीवरी स्पेस में कड़ी प्रतिस्पर्धा और लगातार हो रहे हाई कैश-बर्न रेट का सामना करना पड़ रहा है। IOCC प्लान के टलने के साथ, Swiggy को अपने मार्जिन को सुधारने और मार्केट शेयर को बचाने के वैकल्पिक तरीके खोजने होंगे। निवेशक संभवतः सतर्क रहेंगे और आक्रामक ग्रोथ पर फोकस करने वाली कंपनियों के बजाय, स्थापित प्रॉफिटेबिलिटी वाली कंपनियों को प्राथमिकता देंगे।
