साल 2006 के कुख्यात निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली का हरिद्वार में निधन हो गया है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सभी आरोपों से बरी किए जाने के बाद वे जेल से रिहा हुए थे और 19 साल की कानूनी लड़ाई का अंत हुआ था।
नोएडा के निठारी हत्याकांड से देशभर को दहला देने वाले सुरेंद्र कोली का शुक्रवार को हरिद्वार में निधन हो गया है। शुरुआती जांच में स्थानीय प्रशासन इसे आत्महत्या का मामला मान रहा है, हालांकि घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। इस घटना के साथ ही दो दशकों से चल रहा एक विवादित कानूनी अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है।
मामला और कानूनी सफर
सुरेंद्र कोली को साल 2006 में उनके मालिक मोनिंदर सिंह पंधेर के साथ नोएडा के सेक्टर-31 स्थित बंगले के पास मानव अवशेष मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। यह मामला मीडिया और जनता के बीच भारी चर्चा का विषय रहा, जिसके बाद 2009 तक कोली को कई बार मौत की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने उनकी फांसी पर रोक लगा दी थी।
कोर्ट का फैसला
अभियोजन पक्ष के दावों पर समय के साथ कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए। अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने 12 मामलों में कोली को बरी करते हुए कहा कि जांच एजेंसी सबूतों की कड़ी जोड़ने में विफल रही और कबूलनामे की सत्यता पर भी संदेह जताया गया।
इसके बावजूद, एक अन्य मामले में सजा के कारण कोली को जेल में रहना पड़ा। अंततः 11 नवंबर 2025 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने उनकी अंतिम सजा को भी रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि जो सबूत अन्य मामलों में अपर्याप्त पाए गए, उनके आधार पर सजा बरकरार रखना कानूनी रूप से गलत था। 12 नवंबर 2025 को कसना जेल से रिहाई के बाद कोली हरिद्वार में रह रहे थे।
