सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब सरकार को नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के लिए जमीन का औपचारिक प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। पेड़ काटने पर लगे बैन के कारण अटके इन कामों में अब तेजी आने की उम्मीद है, जिससे इंफ्रा कंपनियों को राहत मिल सकती है।
कानूनी अड़चन और रास्ता
भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब में चल रहे नेशनल हाईवे प्रोजेक्ट्स के डेडलॉक को तोड़ने के लिए दखल दिया है। जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे 'कम्पेन्सेटरी एफॉरेस्टेशन' (Compensatory Afforestation) के लिए जमीन की पहचान कर उसका औपचारिक प्रस्ताव पेश करें। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) लंबे समय से पेड़ों की कटाई और जमीन की कमी के कारण कानूनी उलझन में फंसी थी।
इंफ्रा सेक्टर पर असर
पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के चलते पंजाब में हाईवे निर्माण कार्य 2025 के अंत से ही ठप पड़े थे। राज्य में महज 3.67% फॉरेस्ट कवर होने के कारण पर्यावरण संरक्षण को लेकर कड़े नियम लागू किए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट का यह रुख इंफ्रा और सड़क निर्माण से जुड़ी कंपनियों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
निवेशकों के लिए क्या है मायने?
प्रोजेक्ट्स के लंबे समय तक रुकने से कंपनियों की वर्किंग कैपिटल फंस गई थी और रिवेन्यू मिलने में देरी हो रही थी। इसके अलावा, निर्माण अवधि बढ़ने से कच्चे माल और लेबर की लागत (Cost Overrun) में बढ़ोतरी का रिस्क भी बना हुआ है।
हालांकि, कोर्ट का आदेश एक बड़ी राहत है, लेकिन असली फायदा इस पर निर्भर करेगा कि सरकार कितनी जल्दी प्रस्ताव पेश करती है और उसे मंजूरी मिलती है। निवेशकों को सलाह है कि वे प्रोजेक्ट्स की एक्जीक्यूशन स्पीड और सरकारी अनुपालन पर बारीक नजर रखें, क्योंकि कानूनी प्रक्रियाओं के चलते अभी भी प्रोजेक्ट्स में देरी की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
