Election Commission: फॉर्म 6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
Election Commission: फॉर्म 6 में बदलाव पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले 'फॉर्म 6' में चुनाव आयोग द्वारा किए गए अनधिकृत बदलावों पर सवाल उठाए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि इन बदलावों के लिए कोई मंजूरी नहीं दी गई थी, जिससे संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग (ECI) की प्रशासनिक प्रक्रिया की कड़ी समीक्षा शुरू कर दी है। मामला 'फॉर्म 6' में किए गए उन बदलावों से जुड़ा है, जिसके तहत आवेदकों को अपने विवरण को पिछली मतदाता सूची से लिंक करने का एक अतिरिक्त घोषणा पत्र भरना अनिवार्य कर दिया गया था। यह बदलाव 'स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन' (SIR) अभ्यास के दौरान किए गए, जिन पर अब कानूनी सवाल उठ रहे हैं कि क्या इन्होंने अनिवार्य कानूनी प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया है।

न्यायिक दखल और जवाबदेही

न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि इन संशोधनों के लिए उनकी ओर से कोई भी अनुमति नहीं दी गई थी। अब कोर्ट ने आधिकारिक रिकॉर्ड्स की फॉरेंसिक जांच के निर्देश दिए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आखिर किस अथॉरिटी ने बिना उचित प्रक्रिया के ये बदलाव करने का फैसला लिया। यह मामला Registration of Electors Rules, 1960 के पालन को लेकर आयोग की पारदर्शिता पर सीधा सवाल खड़ा करता है।

संस्था के भीतर मतभेद

यह विवाद केवल एक फॉर्म तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग के भीतर की खींचतान को भी उजागर करता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने आयोग की निर्णय लेने की शैली और बिना आम सहमति के प्रशासनिक बदलावों को लागू करने के खिलाफ कई बार आपत्ति दर्ज कराई थी।

कोर्ट के सख्त रुख के बाद, चुनाव आयोग ने उन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में फॉर्म 6 से विवादास्पद घोषणा को हटा लिया है जहां रिवीजन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। हालांकि यह मामला सीधे शेयर बाजार से नहीं जुड़ा है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की स्थिरता और पारदर्शिता किसी भी देश की आर्थिक और पॉलिसी स्टेबिलिटी के लिए बेहद जरूरी है। अब सबकी निगाहें इस पर हैं कि आयोग अपनी आंतरिक फाइलों में क्या जवाब पेश करता है और क्या मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज पर कोर्ट कोई बड़ी टिप्पणी करता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.