Supreme Court ने Tamil Nadu सरकार को निर्देश दिया है कि वे 'purse seine' फिशिंग जहाजों के लिए एक समर्पित ट्रांजिट कॉरिडोर बनाएं। अदालत ने कहा कि परमिट मिलने में देरी एक तरह का अवैध प्रतिबंध है, क्योंकि **257** में से केवल **6** आवेदन ही मंजूर हुए थे।
कानूनी विवाद और सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
सुप्रीम कोर्ट ने Tamil Nadu सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे मछुआरों के लिए एक आधिकारिक नेविगेशन कॉरिडोर तैयार करें। यह रास्ता 'purse seine' जाल का उपयोग करने वाले जहाजों को राज्य की समुद्री सीमा से होकर 'Exclusive Economic Zone' (EEZ) तक पहुंचने की अनुमति देगा, जहां उन्हें केंद्र सरकार द्वारा फिशिंग की अनुमति प्राप्त है।
अधिकार क्षेत्र का टकराव
यह फैसला 'Tamil Nadu Marine Fishing Regulation Rules, 2020' और केंद्रीय 'Sustainable Harnessing of Fisheries in the Exclusive Economic Zone Rules, 2025' के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद को सुलझाने वाला है। हालांकि राज्य का अधिकार अपनी 12 समुद्री मील की सीमा तक है, लेकिन कोर्ट ने साफ कर दिया है कि स्थानीय नियमों का इस्तेमाल EEZ में जाने से रोकने के लिए नहीं किया जा सकता।
'ReALCRaft' पोर्टल में खामियां
अदालत ने 'ReALCRaft' पोर्टल पर परमिट मिलने की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। अगस्त 2026 तक के आंकड़ों के मुताबिक, 257 आवेदनों में से केवल 6 को मंजूरी मिली थी। बेंच ने इसे 'अघोषित प्रतिबंध' करार देते हुए संविधान के आर्टिकल 19(1)(g) के तहत कारोबार करने के अधिकार का उल्लंघन माना है।
आगे की राह और जोखिम
भले ही कोर्ट ने स्पष्टता दे दी है, लेकिन समुद्री क्षेत्र के लिए चुनौतियां बरकरार हैं। राज्य सरकार के सामने इन गलियारों की निगरानी करना एक जटिल कार्य होगा। इसके अलावा, पारंपरिक मछुआरा समुदाय 'purse seine' तरीके को लेकर पहले से ही विरोध जताते रहे हैं, जिसके कारण भविष्य में कानूनी या सामाजिक अड़चनें आ सकती हैं। निवेशक और स्टेकहोल्डर्स अब यह देख रहे हैं कि पोर्टल की कार्यक्षमता में कितनी तेजी से सुधार होता है।
