Sunil Singhania: भारतीय शेयर बाजार में तेजी का दौर? जाने क्या है एक्सपर्ट की राय!

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Sunil Singhania: भारतीय शेयर बाजार में तेजी का दौर? जाने क्या है एक्सपर्ट की राय!

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Abakkus Asset Manager के दिग्गज निवेशक Sunil Singhania का मानना है कि भारतीय शेयर बाजार एक मजबूत दौर में प्रवेश कर रहा है, क्योंकि प्रमुख जोखिम कम हो रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई है कि कंपनियों की कमाई (Earnings) मजबूत बनी रहेगी, लेकिन उन्होंने ग्लोबल AI स्टॉक्स में तेजी के चरम पर होने को लेकर चेतावनी भी दी है।

क्या हुआ?

Abakkus Asset Manager के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर (CIO) Sunil Singhania ने भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए एक उम्मीद भरा नज़रिया पेश किया है। एक हालिया मार्केट असेसमेंट में उन्होंने कहा कि भारतीय शेयर बाजार अब एक कंस्ट्रक्टिव फेज की ओर बढ़ रहा है। उनका मानना है कि पिछले दो सालों से निवेशकों को जिन बड़े खतरों (Headwinds) की चिंता सता रही थी, जैसे कि हाई जियोपॉलिटिकल टेंशन और करेंसी की अस्थिरता, वे अब मौजूदा शेयर कीमतों में काफी हद तक शामिल हो चुके हैं।

आउटलुक क्यों बदल रहा है?

इस पॉजिटिव स्टैंड के पीछे कई घरेलू और ग्लोबल कारण हैं। Singhania ने बताया कि कच्चे तेल की स्थिर कीमतें, जो उनके अनुमान के मुताबिक $80 प्रति बैरल से नीचे रहेंगी, भारतीय अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत देंगी। चूंकि भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर तेल इम्पोर्ट करता है, इसलिए कम कीमतें इम्पोर्ट बिल को कम करने और महंगाई को काबू में रखने में मदद करती हैं। इसके अलावा, उन्होंने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा विदेशी पूंजी को आकर्षित करने के प्रयासों और कॉर्पोरेट कमाई (Corporate Earnings) में लगातार डबल-डिजिट ग्रोथ को मार्केट के लिए अहम पिलर्स बताया है।

ग्लोबल AI पर चेतावनी

जहां Singhania भारत को लेकर आशावादी हैं, वहीं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर ग्लोबल उत्साह के प्रति वे सतर्क हैं। उन्होंने AI-फोक्स्ड ट्रेड को एक 'क्राउडेड' मार्केट बताया, जिसका मतलब है कि बड़ी संख्या में निवेशक पहले ही इसमें पैसा लगा चुके हैं, जिससे अस्थिरता बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि हाल ही में सेमीकंडक्टर और मेमोरी चिप्स की डिमांड में आई तेजी से कीमतें बढ़ीं, जिससे कॉर्पोरेट रिटर्न ऐसे स्तर तक पहुंच गए जो शायद टिकाऊ न हों। ऐतिहासिक रूप से, ऐसे हाई-कैपिटल इंटेंसिव सेक्टर्स में ज्यादा रिटर्न नई प्रतिस्पर्धा को आकर्षित करता है, जो अंततः कीमतों और मुनाफे को सामान्य स्तर पर ले आता है। यह निवेशकों के लिए एक रिमाइंडर है कि ग्लोबल ग्रोथ स्टोरीज़, चाहे कितनी भी लोकप्रिय क्यों न हों, सप्लाई-डिमांड करेक्शन का सामना कर सकती हैं।

किन सेक्टर्स पर रखें नज़र?

Singhania का खास सेक्टर्स पर नज़रिया बताता है कि वे कहां संभावना देख रहे हैं। उनका मानना है कि बैंकिंग सेक्टर में रिस्क एपेटाइट (Risk Appetite) लौटने से फायदा होने की अच्छी स्थिति में है, जिससे क्रेडिट ग्रोथ और आर्थिक गतिविधि प्रदर्शन को आगे बढ़ा सकती है। वे मेटल्स सेक्टर और कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी स्टॉक्स में भी वैल्यू देखते हैं। उनके अनुसार, कंज्यूमर स्टॉक्स वर्तमान में अंडर-ओन्ड (Under-owned) हैं, और मांग में थोड़ी सी भी सुधार इन कंपनियों के लिए पॉजिटिव री-रेटिंग (Re-rating) को ट्रिगर कर सकता है। इसके विपरीत, वे आईटी सर्विसेज सेक्टर के प्रति सतर्क रुख बनाए हुए हैं। यह सावधानी संभावित करेंसी मूवमेंट से जुड़ी है; मजबूत होता रुपया उन आईटी कंपनियों के प्रॉफिट मार्जिन को कम कर सकता है जो डॉलर में कमाई करती हैं और रुपये में रिपोर्ट करती हैं।

जोखिम और निवेशकों के लिए ध्यान देने योग्य बातें

सकारात्मक दृष्टिकोण के बावजूद, बाजार जोखिमों से मुक्त नहीं है। जियोपॉलिटिकल टेंशन, खासकर पश्चिम एशिया में, एक संभावित डिस्टर्बेंस बना हुआ है जो अगर बढ़ता है तो मार्केट के सेंटिमेंट को प्रभावित कर सकता है। हालांकि Singhania का मानना है कि भारतीय कंपनियां इन व्यवधानों को संभालने में सक्षम हैं, फिर भी यह एक फैक्टर है जिस पर नज़र रखने की ज़रूरत है। निवेशकों के लिए, मुख्य बात यह होगी कि कमाई की ग्रोथ (Earnings Growth) का वास्तविक कार्यान्वयन (Execution) कैसा रहता है। साल के लिए 15-17% प्रॉफिट ग्रोथ की उम्मीदों के साथ, बाजार कंपनियों से इन लक्ष्यों को तिमाही-दर-तिमाही पूरा करने की उम्मीद करेगा। निवेशक इस बात पर नज़र रख सकते हैं कि अलग-अलग सेक्टर घरेलू मांग और ग्लोबल हेडविंड्स के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

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Disclaimer:This article is published for informational purposes only. While reasonable efforts are made to ensure accuracy, completeness, and timeliness, readers are encouraged to independently verify information before making any decisions based on the content. The views and information presented are subject to editorial review and may be updated without notice.