शेयरधारकों की बल्ले-बल्ले: 100% डिविडेंड का ऐलान
Star Cement Limited के बोर्ड ने 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हुई तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए अपने अन-ऑडिटेड (Un-audited) स्टैंडअलोन और कंसोलिडेटेड फाइनेंशियल नतीजों को मंजूरी दे दी है। इस मौके पर, बोर्ड ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 के लिए 100% का दूसरा अंतरिम डिविडेंड (Interim Dividend) घोषित किया है। यह डिविडेंड प्रति इक्विटी शेयर ₹1 के हिसाब से होगा, जिसका फेस वैल्यू भी ₹1 है। इस डिविडेंड के लिए रिकॉर्ड डेट 12 फरवरी 2026 तय की गई है, और शेयरधारकों को इसका भुगतान 8 मार्च 2026 तक कर दिया जाएगा।
प्रमोटरों के स्टेटस में बड़ा बदलाव
एक अहम कॉर्पोरेट एक्शन (Corporate Action) के तहत, कंपनी ने 'चमारिया ग्रुप' (Chamaria Group) के 29 सदस्यों को 'प्रमोटर एंड प्रमोटर ग्रुप' (Promoter & Promoter Group) कैटेगरी से 'पब्लिक' (Public) कैटेगरी में री-क्लासिफाई (Re-classify) करने का प्रस्ताव रखा है। हालांकि, इस बदलाव के लिए स्टॉक एक्सचेंजों से मंजूरी मिलना आवश्यक है।
लेबर कोड्स के कारण ₹5.52 करोड़ का एक्सेप्शनल आइटम
कंपनी ने अपने वित्तीय नतीजों में एक एक्सेप्शनल आइटम (Exceptional Item) के तौर पर ₹552.03 लाख यानी करीब ₹5.52 करोड़ का एडजस्टमेंट दर्ज किया है। यह रकम भारत सरकार द्वारा जारी चार नए लेबर कोड्स (Labour Codes) से जुड़े नियमों में बदलाव के कारण पड़े फाइनेंशियल इंपैक्ट (Financial Impact) के आकलन से संबंधित है। कंपनी ने यह भी बताया है कि वह सेंट्रल/स्टेट रूल्स (Central/State Rules) और सरकारी स्पष्टीकरणों (Clarifications) के अंतिम रूप देने की प्रक्रिया पर नज़र रखेगी।
हालांकि, इस घोषणा में तिमाही और नौ महीनों के लिए रेवेन्यू (Revenue) और प्रॉफिट (Profit) के स्पेसिफिक आंकड़े विस्तार से नहीं बताए गए हैं, लेकिन ऑडिट कमेटी (Audit Committee) और स्टेट्यूटरी ऑडिटर्स (Statutory Auditors) की समीक्षा के बाद बोर्ड ने इन नतीजों को अपनी मंजूरी दे दी है।
आगे क्या?
निवेशकों को प्रमोटर री-क्लासिफिकेशन पर स्टॉक एक्सचेंज की मंजूरी का इंतज़ार रहेगा, क्योंकि इससे कंपनी की शेयरहोल्डिंग स्ट्रक्चर (Shareholding Structure) प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा, नए लेबर कोड्स के कारण पड़ने वाले फाइनेंशियल इंपैक्ट पर भी पैनी नज़र रखनी होगी, जिसके बारे में कंपनी ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नज़र रखे हुए है। सीमेंट सेक्टर में कंपनी के ऑपरेशनल परफॉरमेंस (Operational Performance) पर भी बाज़ार की निगाहें बनी रहेंगी।