FY26 की तीसरी तिमाही और नौ महीनों के लिए Spencer's Retail Limited के नतीजे मिले-जुले रहे, जिसमें हालिया तिमाही में वित्तीय दबाव साफ दिख रहा है।
स्टैंडअलोन नतीजे (Standalone Performance)
स्टैंडअलोन बेसिस पर, Q3 FY26 के लिए रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस (Revenue from Operations) पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 2.43% घटकर ₹42,057.18 लाख रहा। इसी के साथ, स्टैंडअलोन नेट लॉस (Standalone Net Loss) 14.09% बढ़कर ₹3,325.01 लाख हो गया, जो पिछले साल ₹2,914.04 लाख था। हालांकि, नौ महीनों (9MFY26) की अवधि को देखें तो स्टैंडअलोन नेट लॉस में 33.09% की बड़ी गिरावट आई है, जो ₹9,808.29 लाख रहा, जबकि पिछले साल यह ₹14,657.55 लाख था।
कंसोलिडेटेड प्रदर्शन (Consolidated Performance)
कंसोलिडेटेड आंकड़े भी यही ट्रेंड दिखा रहे हैं, जिसमें तिमाही दबाव स्पष्ट है। Q3 FY26 के लिए कंसोलिडेटेड रेवेन्यू फ्रॉम ऑपरेशंस 2.73% गिरकर ₹50,286.92 लाख रहा। कंसोलिडेटेड नेट लॉस भी काफी 23.24% बढ़कर ₹5,834.53 लाख हो गया, जो Q3 FY25 में ₹4,734.20 लाख था। वहीं, 31 दिसंबर, 2025 को समाप्त नौ महीनों के लिए कंसोलिडेटेड नेट लॉस 3.25% बढ़कर ₹18,374.77 लाख हो गया, जो चिंताजनक है।
वर्किंग कैपिटल गैप: सबसे बड़ी चिंता (The Working Capital Gap)
कंपनी की वित्तीय सेहत का एक बड़ा इंडिकेटर, वर्किंग कैपिटल पोजीशन, चिंता का विषय बनी हुई है। 31 दिसंबर, 2025 तक, स्टैंडअलोन बेसिस पर करंट लायबिलिटीज (Current Liabilities) करंट एसेट्स (Current Assets) से ₹81,225.63 लाख अधिक थीं। कंसोलिडेटेड स्तर पर यह अंतर और भी बड़ा है, जो ₹1,02,100.80 लाख है। यह भारी कमी लिक्विडिटी (Liquidity) पर दबाव और शॉर्ट-टर्म फाइनेंसिंग पर निर्भरता का संकेत देती है।
अन्य अपडेट्स और मैनेजमेंट का रुख
कंपनी ने नए लेबर कोड (Labour Codes) के लागू होने के कारण इम्प्लॉई बेनिफिट लायबिलिटीज (Employee Benefit Liabilities) में ₹259.87 लाख (स्टैंडअलोन) और ₹375.74 लाख (कंसोलिडेटेड) की वृद्धि दर्ज की है।
हालांकि, कंपनी के मैनेजमेंट का भरोसा है कि वे अगले 12 महीनों में अपनी देनदारियों को पूरा करने में सक्षम होंगे। इसके लिए, कंपनी घाटा पैदा करने वाले स्टोर्स को बंद करने और कॉस्ट कटिंग (Cost Cutting) के जरिए मार्जिन इम्प्रूवमेंट (Margin Improvement) पर फोकस कर रही है। मिस्टर अनुज सिंह (Mr. Anuj Singh) को सीईओ और एमडी (CEO & MD) के रूप में फिर से नियुक्त किया गया है, जो लीडरशिप में निरंतरता का संकेत देता है। निवेशकों की निगाहें अब कंपनी की प्रॉफिटेबिलिटी (Profitability) को सुधारने और वर्किंग कैपिटल की स्थिति को स्थिर करने की रणनीति पर टिकी रहेंगी।