Specialised Investment Funds (SIFs) यानी विशेष निवेश फंडों का असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) जून में **29%** बढ़कर **₹17,858** करोड़ हो गया है। हाइब्रिड स्ट्रैटेजी की ज़बरदस्त डिमांड और पारंपरिक म्यूचुअल फंड्स व पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (PMS) के बीच का अंतर पाटने वाले प्रोडक्ट्स में निवेशकों का रुझान बढ़ा है।
स्पेशल इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIFs) में क्यों आई तेजी?
बाजार में नए-नए Specialised Investment Funds (SIFs) कैटेगरी में जून के महीने में कुल असेट्स अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹17,858 करोड़ के पार पहुंच गया। पिछले महीने की तुलना में यह 29.3% की बड़ी उछाल है। यह दिखाता है कि निवेशक अब ऐसे वित्तीय प्रोडक्ट्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं जो आम रिटेल म्यूचुअल फंड्स से ज़्यादा कॉम्प्लेक्स इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी ऑफर करते हैं।
हाइब्रिड स्ट्रैटेजी का जलवा
इस ग्रोथ की सबसे बड़ी वजह हाइब्रिड इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी रही, जिसने जून में ₹3,782 करोड़ का नेट इनफ्लो आकर्षित किया। मई में यह आंकड़ा ₹1,396 करोड़ था। अब हाइब्रिड फंड्स के पास इंडस्ट्री के कुल AUM का 72% हिस्सा है, जिसकी वैल्यू ₹12,822 करोड़ है। इसमें भी सबसे बड़ा हिस्सा Hybrid Long-Short Funds का है, जो ₹11,910 करोड़ मैनेज करते हैं। यह सेगमेंट इंडस्ट्री के कुल असेट्स का लगभग 67% है। यहाँ निवेशकों का औसत निवेश ₹35 लाख है, जो बताता है कि ये प्रोडक्ट्स फिलहाल हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) को ज़्यादा पसंद आ रहे हैं।
इक्विटी-ओरिएंटेड SIFs में भी पकड़
हाइब्रिड स्ट्रैटेजी भले ही हावी है, लेकिन इक्विटी-ओरिएंटेड SIFs भी अपनी जगह बना रहे हैं। ये फंड्स इंडस्ट्री के कुल AUM का 28% यानी ₹5,036 करोड़ संभालते हैं। जून में इनमें ₹1,097 करोड़ का इनफ्लो आया, जो मई के ₹652 करोड़ की तुलना में 68% ज़्यादा है। 2025 के आखिर में लॉन्च होने के बाद से, सभी कैटेगरी के SIFs ने कुल ₹17,407 करोड़ का इनफ्लो जमा किया है, जो पिछले कुछ महीनों से निवेशकों की लगातार रुचि को दर्शाता है।
व्यापक इंडस्ट्री के बीच SIFs की स्थिति
SIFs का यह उभार भारतीय म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में चल रही तेज़ी के बीच आया है, जिसका कुल AUM ₹82.2 लाख करोड़ तक पहुंच गया है। उसी महीने, एक्टिव इक्विटी म्यूचुअल फंड्स ने ₹67,601 करोड़ का ग्रॉस इनफ्लो दर्ज किया, जबकि नेट इनफ्लो ₹28,973 करोड़ रहा। म्यूचुअल फंड स्पेस में हाइब्रिड फंड्स (आर्बिट्रेज स्कीम्स को छोड़कर) ने भी ₹7,163 करोड़ का नेट इनफ्लो देखा। यह दिखाता है कि डाइवर्सिफाइड एसेट एलोकेशन की मांग सिर्फ SIFs तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे इन्वेस्टमेंट सेक्टर में दिख रही है।
निवेशकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह होगी कि ये फंड्स अलग-अलग मार्केट साइकल्स में कैसा प्रदर्शन करते हैं, खासकर इसलिए क्योंकि इनमें से कई स्ट्रैटेजी पारंपरिक फंड्स की तुलना में ज़्यादा एक्टिव मैनेजमेंट पर निर्भर करती हैं। जैसे-जैसे यह सेक्टर बढ़ेगा, इनफ्लो की कंसिस्टेंसी और अपने शुरुआती एसेट बेस से आगे बढ़ने पर फंड्स के परफॉर्मेंस पर नज़र बनी रहेगी।
