वैल्यूएशन पर बड़ा सवाल
SpaceX का पब्लिक मार्केट में डेब्यू भले ही ऐतिहासिक हो, लेकिन कंपनी के $1.75 ट्रिलियन के टारगेट वैल्यूएशन और स्वतंत्र फंडामेंटल अनुमानों के बीच का बड़ा अंतर चिंता का विषय बना हुआ है। जाने-माने वैल्यूएशन विशेषज्ञ Aswath Damodaran ने कंपनी के इंट्रिंसिक इक्विटी वैल्यू का अनुमान $1.3 ट्रिलियन के करीब लगाया है। यह अंतर मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में कंपनी के आक्रामक विस्तार के कारण है, जहां भारी पूंजी खर्च और कड़ी प्रतिस्पर्धा के चलते निवेशकों द्वारा लगाए जा रहे प्रीमियम पर सवाल उठ रहे हैं।
AI में भारी निवेश का असर
SpaceX अब सिर्फ एक एयरोस्पेस कंपनी नहीं रही, बल्कि AI और सैटेलाइट इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोवाइडर बन गई है। जहां Starlink कनेक्टिविटी से 2025 में $18.7 बिलियन का रेवेन्यू दिख रहा है, वहीं कंपनी का xAI बिजनेस यूनिट पर निर्भरता बढ़ रही है। लॉन्च और सैटेलाइट सेगमेंट के विपरीत, AI आर्म को भारी री-इन्वेस्टमेंट की जरूरत है। Damodaran ने IPO प्रॉस्पेक्टस में बताए गए टोटल एड्रेसेबल मार्केट (TAM) के अनुमानों को भी काल्पनिक बताया है। Rocket Lab जैसी कंपनियों या पुरानी डिफेंस कंपनियों की तुलना में, SpaceX को मिले प्रीमियम का आधार यह उम्मीद है कि वह AI डिवीजन को घाटे में चलाते हुए भी अपनी शुरुआती बढ़त बनाए रखेगा।
गवर्नेंस पर चिंताएं
वैल्यूएशन के अलावा, संस्थागत निवेशकों के लिए कंपनी की गवर्नेंस स्ट्रक्चर एक बड़ी चिंता है। CEO Elon Musk के पास डुअल-क्लास शेयर अरेंजमेंट के जरिए सुपर-वोटिंग पावर है, जिससे उन्हें पूरा कंट्रोल मिलता है। यह स्ट्रक्चर मैनेजमेंट को शेयरधारकों के प्रति जवाबदेही से बचाता है। इसके अलावा, 2025 में कंपनी को $4.9 बिलियन का नेट लॉस हुआ है, जो ऑपरेशनल एफिशिएंसी की जरूरत को दर्शाता है। फाउंडर की मल्टी-फर्म जिम्मेदारियां और लॉन्च प्रोजेक्ट्स की अस्थिरता इसे हाई-रिस्क, हाई-रिवॉर्ड प्रोफाइल बनाती है, जिसके चलते कई बड़े इन्वेस्टमेंट फंड्स ने इसे पहले ही ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
भविष्य का रुख
12 जून को होने वाली लिस्टिंग पर मार्केट की प्रतिक्रिया इस बात पर निर्भर करेगी कि क्या रिटेल डिमांड, वैल्यूएशन विशेषज्ञों की चिंताओं पर हावी हो पाती है। SpaceX की मार्केट बनाने की क्षमता निर्विवाद है, लेकिन उम्मीद है कि जल्द ही फोकस IPO की शुरुआती उत्साह से हटकर तिमाही मार्जिन ग्रोथ और xAI सेगमेंट की इकोनॉमिक वायबिलिटी पर जाएगा। एनालिस्ट्स का मानना है कि भले ही लॉन्ग-टर्म ग्रोथ की संभावनाएं मजबूत हैं, मौजूदा एंट्री प्राइस में एक बड़ा "मस्क प्रीमियम" शामिल है, जिस पर दबाव आ सकता है अगर कंपनी AI डेवलपमेंट में तेजी से प्रगति नहीं दिखा पाती है।
