Southern Railway ने तमिलनाडु सरकार से मांग की है कि रेलवे ट्रैक और स्टेशनों के पास स्थित 43 TASMAC शराब की दुकानों को तुरंत दूसरी जगह शिफ्ट किया जाए। रेलवे का कहना है कि इन दुकानों के कारण सुरक्षा को बड़ा खतरा है और यात्रियों को भी परेशानी झेलनी पड़ रही है।
सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा
रेलवे अथॉरिटी ने साफ किया है कि ट्रैक के करीब इन दुकानों की मौजूदगी न केवल यात्रियों की सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि रेलवे के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए भी बड़ी चुनौती बनी हुई है। अधिकारियों ने बताया है कि शराब पीकर लोग अक्सर ट्रैक पर बिना अनुमति के घुस जाते हैं, जिससे हादसों की आशंका बढ़ गई है। इसके अलावा, शाम के समय यात्रियों, खासकर महिलाओं के साथ छेड़छाड़ की घटनाएं और सिग्नलिंग के लिए जरूरी कॉपर वायर जैसी कीमती चीजों के साथ छेड़छाड़ की खबरें भी सामने आई हैं।
प्रमुख स्टेशनों पर बुरा हाल
अंबत्तूर (Ambattur), तिरुवल्लुर (Tiruvallur) और वेल्लोर (Vellore) जैसे व्यस्त स्टेशनों पर सबवे का इस्तेमाल 'ड्रिंकिंग डेन' की तरह हो रहा है, जो डेली कम्यूटर्स के लिए खतरनाक माहौल पैदा कर रहा है।
क्यों फंसा है पेंच?
TASMAC, जो कि तमिलनाडु में शराब का रिटेल बिजनेस संभालता है, के लिए नई जगह खोजना मुश्किल हो रहा है। पहले भी सरकार ने स्कूलों और धार्मिक स्थलों के पास से 700 से ज्यादा दुकानें हटाई हैं, लेकिन अब रेलवे ट्रैक के पास खाली जगह और स्थानीय लोगों के विरोध के चलते उन्हें नई लोकेशन नहीं मिल पा रही है।
कानूनी गैप (Regulatory Gap)
सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि स्कूलों या धार्मिक स्थलों की तरह रेलवे ट्रैक के आसपास शराब की दुकान न खोलने को लेकर फिलहाल कोई सख्त कानून या 'बफर जोन' की पॉलिसी नहीं है। यह नियम न होने के कारण अब रेलवे की सुरक्षा जरूरतों और राज्य सरकार के रेवेन्यू मॉडल के बीच एक गतिरोध पैदा हो गया है। अब निवेशकों और आम लोगों की नजर इस पर टिकी है कि क्या सरकार रेलवे ट्रैक के लिए कोई नया सुरक्षा कानून लाएगी या यह विवाद यूं ही चलता रहेगा।
