कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर 2017 में की गई टिप्पणियों की कड़ी आलोचना करते हुए एक लेख लिखा है। यह बयान सुप्रीम कोर्ट द्वारा मनमोहन सिंह को कोयला आवंटन मामले में बरी किए जाने के बाद आया है। गांधी ने पीएम मोदी की उन टिप्पणियों को संसदीय इतिहास का 'निम्न स्तर' करार दिया है।
कांग्रेस की दिग्गज नेता सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने एक लेख में 2017 में राज्यसभा में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के बारे में पीएम मोदी द्वारा की गई टिप्पणियों की आलोचना की है। गांधी ने सिंह की निर्णय लेने की क्षमता पर सवाल उठाने वाली उन टिप्पणियों को संसदीय इतिहास का 'निम्न स्तर' बताया है।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले का संदर्भ
सोनिया गांधी का यह तीखा बयान 29 जुलाई 2026 के एक अहम कानूनी फैसले के बाद आया है। सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में बरकरार रखा था। शीर्ष अदालत के इस फैसले से मनमोहन सिंह उन आरोपों से प्रभावी रूप से बरी हो गए थे, जिन्होंने उनके अंतिम वर्षों को प्रभावित किया था। पूर्व प्रधानमंत्री, जिनका निधन 27 दिसंबर 2024 को हुआ था, आरोपों से औपचारिक रूप से बरी कर दिए गए, जिससे यह लंबे समय से चल रहा कानूनी मामला समाप्त हो गया।
2017 की संसदीय टिप्पणियाँ
अपने लेख में, गांधी ने 2017 की उन टिप्पणियों का उल्लेख किया जहाँ प्रधानमंत्री ने मनमोहन सिंह की निर्णायक रूप से कार्य करने की क्षमता पर कटाक्ष करते हुए 'बरसात में रेनकोट पहनकर नहाने' जैसा रूपक इस्तेमाल किया था। गांधी ने तर्क दिया कि ये टिप्पणियाँ 'अशोभनीय निंदा' का एक उदाहरण थीं। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रधानमंत्री, जिन्होंने हाल ही में छात्रों द्वारा की गई आलोचनाओं को माफ करने की बात कही है, उन्हें अपने ही पिछले बयानों पर भी ऐसा ही आत्मनिरीक्षण करना चाहिए।
जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के आरोप
पूर्व प्रधानमंत्री पर की गई विशिष्ट टिप्पणियों से परे, गांधी ने अपने लेख का उपयोग वर्तमान राजनीतिक माहौल के बारे में व्यापक चिंताएं व्यक्त करने के लिए किया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और सीबीआई जैसी जांच एजेंसियों का दुरुपयोग राजनीतिक विरोधियों पर दबाव डालने के लिए किया जा रहा है। उनका दावा है कि इन एजेंसियों का इस्तेमाल या तो आलोचकों को चुप कराने या उन्हें सत्ताधारी दल में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए किया गया है। उन्होंने एक ऐसे पैटर्न का सुझाव दिया जहाँ विपक्षी सदस्यों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों का आक्रामक रूप से पीछा किया जाता है, जबकि सत्ताधारी दल के सदस्यों के खिलाफ समान आरोपों को खारिज कर दिया जाता है।
आर्थिक और राजनीतिक विरासत
गांधी ने यूपीए (UPA) युग के शासन रिकॉर्ड की तुलना वर्तमान प्रशासन से भी की। उन्होंने मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान, विशेष रूप से 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान देखे गए आर्थिक विकास और लचीलेपन पर प्रकाश डाला। ईमानदारी और जवाबदेही के उनके रिकॉर्ड पर ध्यान केंद्रित करके, वह सिंह की विरासत को राष्ट्रीय प्रगति के एक महत्वपूर्ण काल के रूप में स्थापित करना चाहती हैं, जिसकी तुलना वह वर्तमान सरकार की 'शासन चुनौतियों' से करती हैं। यह घटनाक्रम सत्ताधारी दल और विपक्ष के बीच राजनीतिक विमर्श के मानकों और भारत की नियामक व जांच संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर चल रही तीव्र बहस का एक और चरण है।
