सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 17 दिन पूरे, सेहत को लेकर चिंता बढ़ी

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AuthorNeha Patil|Published at:
सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल के 17 दिन पूरे, सेहत को लेकर चिंता बढ़ी

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक NEET परीक्षा में गड़बड़ी के विरोध में 17वें दिन भी भूख हड़ताल पर हैं। उनकी सेहत बिगड़ रही है, **8.2 किलो** वजन घट चुका है और ग्लूकोज लेवल कम है। ऐसे में, बड़े नेता उनसे आंदोलन को जारी रखने के लिए अपनी सेहत का ख्याल रखने की गुहार लगा रहे हैं।

एक्टिविस्ट और शिक्षाविद सोनम वांगचुक के नेतृत्व में चल रहा विरोध प्रदर्शन एक गंभीर मोड़ पर पहुँच गया है, क्योंकि उनकी भूख हड़ताल आज 17वें दिन में प्रवेश कर गई है। 28 जून को शुरू हुई यह हड़ताल NEET (नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट) परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोपों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांगों का केंद्र बिंदु बन गई है।

सेहत पर असर और चिंताजनक आंकड़े

वांगचुक की सेहत को लेकर हालिया अपडेट्स ने उनके समर्थकों और समाज के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है। रिपोर्टों से पता चलता है कि अनशन शुरू होने के बाद से एक्टिविस्ट का वजन लगभग 8.2 किलोग्राम कम हो गया है। मेडिकल निगरानी में ब्लड प्रेशर 107/70 mmHg और ब्लड ग्लूकोज लेवल 67 mg/dL दर्ज किया गया है, जो समाज के विभिन्न वर्गों से उन्हें विरोध प्रदर्शन समाप्त करने के लिए तत्काल अपील का कारण बन रहे हैं।

जानी-मानी हस्तियों की अपील

राजनीति, शिक्षा और कला जगत की जानी-मानी हस्तियों ने वांगचुक से अपनी सेहत का ध्यान रखने की अपील की है। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, दोनों ने सार्वजनिक रूप से उनसे अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने का अनुरोध किया है, यह कहते हुए कि उनका आंदोलन के लिए योगदान लंबे समय तक महत्वपूर्ण है। इसी तरह, अभिनेता ओमी वैद्य ने भी चिंता व्यक्त की है और इस आंदोलन में वांगचुक के नेतृत्व के महत्व पर प्रकाश डाला है।

प्रभावशाली नागरिकों के एक समूह, जिसमें लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह और रत्ना पाठक शाह, और अर्थशास्त्री जयती घोष शामिल हैं, ने भी आंदोलन के प्रति गहरा समर्थन व्यक्त किया है। समूह ने इस बात पर जोर दिया कि यह आंदोलन मैराथन की तरह है, स्प्रिंट की तरह नहीं, और आगे के लंबे संघर्षों के लिए वांगचुक की उपस्थिति आवश्यक है। इन अपीलों के बावजूद, उनकी स्थिति की निगरानी करने वाले व्यक्तियों की रिपोर्टों से पता चलता है कि एक्टिविस्ट अपने रुख पर कायम हैं और उठाए गए मुद्दों के संबंध में सरकारी संवाद की कमी पर सवाल उठा रहे हैं।

NEET आंदोलन का संदर्भ

यह विरोध NEET परीक्षा प्रक्रिया की अखंडता को लेकर व्यापक चिंताओं से उपजा है। इस स्थिति ने छात्र संगठनों और शिक्षा मंत्रालय के बीच व्यापक तनाव को उजागर किया है। जैसे-जैसे भूख हड़ताल जारी है, विरोध में शामिल अन्य कार्यकर्ताओं ने भी स्वास्थ्य संबंधी जटिलताओं की सूचना दी है, जिनमें से कुछ को पहले ही अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। निवेशक और जनता वर्तमान में इस बात पर नज़र रख रहे हैं कि क्या सरकार गतिरोध को हल करने के लिए एक औपचारिक संवाद शुरू करेगी, क्योंकि विरोध की निरंतर प्रकृति भारत के शिक्षा क्षेत्र के भीतर नियामक और प्रशासनिक चिंताओं पर राष्ट्रीय ध्यान आकर्षित कर रही है।

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