भारत की स्मार्टफोन प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने कमाल कर दिया है! FY26 तक उत्पादन **$71 अरब** तक पहुँच गया है, जो FY20 के **$30 अरब** से काफी ज़्यादा है। निर्यात में भी **10 गुना** की बढ़ोतरी हुई है, जिससे सरकार अब इस स्कीम को आगे बढ़ाने और दूसरे सेक्टरों के लिए मॉडल बनाने पर विचार कर रही है।
कैसे हुआ इतना बड़ा बदलाव?
स्मार्टफोन के लिए प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) स्कीम ने बड़े मील के पत्थर हासिल किए हैं। साल 2020 में जहां उत्पादन $30 अरब था, वहीं 2026 फाइनेंशियल ईयर तक यह बढ़कर $71 अरब हो गया है। कॉमर्स मिनिस्ट्री को मिली इंडस्ट्री के आंकड़ों के मुताबिक, यह ग्रोथ डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट्स में बड़ी तेजी की वजह से हुई है। खास तौर पर, मोबाइल फोन एक्सपोर्ट्स इसी छह साल की अवधि में $3 अरब से बढ़कर $29.4 अरब हो गए हैं। इस बड़ी उपलब्धि ने भारत को दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता (चीन के बाद) बना दिया है।
डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन में बड़ा इजाफा
स्कीम के असर को मापने का एक अहम पैमाना है डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन, जो करीब 18-19% तक पहुंच गया है, यानी इसमें चौगुनी वृद्धि हुई है। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि यह तरक्की सिर्फ छह साल में हुई है, जो चीन के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के मुकाबले काफी तेज है। डोमेस्टिक वैल्यू एडिशन में यह बढ़ोतरी दिखाती है कि अब भारत में ज़्यादा कंपोनेंट्स और असेंबली का काम हो रहा है, न कि सिर्फ इम्पोर्ट किए गए सेमी-फिनिश्ड गुड्स की फाइनल असेंबली पर निर्भरता है।
पॉलिसी का असर और ट्रेड
Apple, Foxconn और Google जैसी बड़ी कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाली इंडिया सेलुलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (ICEA) ने ये आंकड़े सरकार को पॉलिसी की इफेक्टिवनेस के सबूत के तौर पर पेश किए हैं। इस स्कीम ने ट्रेड पैटर्न को भी प्रभावित किया है; अब मोबाइल फोन भारत के अमेरिका को होने वाले कुल मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट्स का 21% हिस्सा हैं। 2024-2025 के बीच, अमेरिका को इन डिवाइसेज के एक्सपोर्ट्स में 178% की ग्रोथ देखी गई, जो $19.7 अरब तक पहुंच गया। यह दिखाता है कि PLI ने भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को ग्लोबल सप्लाई चेन्स में बेहतर तरीके से इंटीग्रेट करने में मदद की है।
निवेशकों के लिए आगे क्या?
सरकार फिलहाल स्मार्टफोन PLI फ्रेमवर्क को आगे बढ़ाने को लेकर अंतर-मंत्रालयीय चर्चा कर रही है। निवेशकों के लिए, इस स्कीम की सफलता यह बताती है कि भविष्य में दूसरे सेक्टरों के लिए भी इसी तरह के इंसेंटिव डिजाइन किए जा सकते हैं। प्रोडक्शन ग्रोथ भले ही काफी मजबूत है, लेकिन लिस्टेड मैन्युफैक्चरिंग और कंपोनेंट कंपनियों के लिए लॉन्ग-टर्म फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि यह वैल्यू एडिशन कितनी टिकाऊ बनी रहती है। निवेशक स्कीम के संभावित एक्सटेंशन से जुड़ी भविष्य की पॉलिसी घोषणाओं पर नज़र रख सकते हैं, क्योंकि यह इलेक्ट्रॉनिक्स इकोसिस्टम में शामिल कंपनियों के कैपिटल एलोकेशन और एक्सपेंशन प्लान्स को प्रभावित करेगा।
