Zomato और Swiggy को बड़ा झटका! छोटे रेस्टोरेंट छोड़ रहे हैं महंगे कमीशन वाले ऐप्स, मार्जिन पर आई बड़ी आफत

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AuthorNeha Patil|Published at:
Zomato और Swiggy को बड़ा झटका! छोटे रेस्टोरेंट छोड़ रहे हैं महंगे कमीशन वाले ऐप्स, मार्जिन पर आई बड़ी आफत
Overview

भारत के छोटे और मझोले रेस्टोरेंट अब ऊंचे कमीशन वाली फूड डिलीवरी ऐप्स से दूरी बना रहे हैं। इन रेस्टोरेंट्स के लिए मार्जिन बचाना मुश्किल हो गया है, जिस कारण वे ONDC और कम कमीशन वाले प्लेटफॉर्म्स की ओर रुख कर रहे हैं। यह Zomato और Swiggy जैसी बड़ी कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है, जिन पर पहले से ही मुनाफे को लेकर दबाव और रेगुलेटरी जांच चल रही है।

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मार्जिन पर संकट गहराया

भारत के फूड डिलीवरी मार्केट पर राज करने वाली Zomato और Swiggy के लिए एक बड़ा मोड़ आ गया है। अब छोटे रेस्टोरेंट इन प्लेटफॉर्म्स से बाहर निकलना शुरू कर रहे हैं। ये प्लेटफॉर्म्स पहले ऑर्डर की रकम का 15% से 30% तक कमीशन के तौर पर लेते थे। बढ़ती महंगाई और ग्राहकों की घटती खर्च क्षमता के चलते, छोटे रेस्टोरेंट्स - जैसे लोकल कैफे या पारिवारिक रेस्तरां - के लिए यह कमीशन देना नामुमकिन सा हो गया है। बड़े रेस्टोरेंट चेन के विपरीत, जो मोलभाव करके बेहतर डील ले लेते हैं, छोटे ऑपरेटर अब मेन्यू प्राइस बढ़ाकर ग्राहकों से यह लागत वसूल रहे हैं। इससे कीमतों में बड़ा अंतर आ रहा है, जो उनके रेगुलर डाइन-इन ग्राहकों को भी दूर कर सकता है।

जीरो-कमीशन की ओर बढ़ता कदम

रेस्टोरेंट की इसी नाराजगी के चलते अब कम कमीशन या जीरो-कमीशन वाले प्लेटफॉर्म्स की डिमांड बढ़ रही है। Waayu और SnapMenu जैसे प्लेटफॉर्म्स ग्राहकों को रेस्टोरेंट खोजने में मदद करते हैं, लेकिन लॉजिस्टिक्स और कस्टमर मैनेजमेंट रेस्टोरेंट खुद संभालते हैं। इसके अलावा, सरकार के Open Network for Digital Commerce (ONDC) प्लेटफॉर्म भी इस बदलाव में अहम भूमिका निभा रहा है। यह एक डिसेंट्रलाइज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर देता है, जो बड़े एग्रीगेटर्स के महंगे और फिक्स्ड फ्रेमवर्क से अलग है। इससे सीधे ग्राहक और रेस्टोरेंट के बीच संपर्क बनता है, जिससे वह पैसा बचता है जो पहले प्लेटफॉर्म खा जाता था। यह मॉडल बड़े एग्रीगेटर्स के डेटा और कस्टमर लॉयल्टी पर एकाधिकार को चुनौती दे रहा है।

निवेशकों के लिए चिंता का सबब

यह ट्रेंड निवेशकों के लिए चिंता का विषय है। रेस्टोरेंट के बाहर निकलने से यह साफ होता है कि ग्रोथ के साथ-साथ इकोनॉमिक वायबिलिटी (आर्थिक व्यवहार्यता) बनाए रखना कितना मुश्किल है। भले ही Zomato और Swiggy ने Q4 FY26 में अपने बिजनेस के बड़े नंबर्स दिखाए हों, लेकिन उनका हाई-कमीशन वाला मॉडल एंटीट्रस्ट जांच के दायरे में आ गया है। भारत की कंपटीशन कमीशन (CCI) ने पहले भी एक्सक्लूसिविटी क्लॉज और प्लेटफॉर्म न्यूट्रैलिटी जैसे मुद्दों पर चिंता जताई थी, जिससे मार्केट में मोनोपॉली बढ़ सकती है। हाल ही में Swiggy के शेयर 52-हफ्ते के निचले स्तर पर गिरे हैं, जो यह दिखाता है कि मार्केट को यह समझाने में अभी भी दिक्कत है कि कंपनी मुनाफे के गैप को कैसे भरेगी।

भविष्य की राह और नई प्रतिस्पर्धा

ग्राहक अब डिलीवरी ऐप्स के छुपे हुए खर्चों को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। वे सर्विस फीस और प्राइस मार्कअप को ध्यान से देख रहे हैं। ऐसे में, जो प्लेटफॉर्म्स अपनी कमाई के लिए डायनामिक प्राइसिंग और कमीशन पर निर्भर हैं, उनके लिए यह एक बड़ा खतरा है। भविष्य में Zomato और Swiggy जैसी कंपनियों को कमीशन लेने के बजाय वैल्यू-ऐडेड सर्विसेज, जैसे एडवरटाइजिंग, सब्सक्रिप्शन मॉडल या क्विक-कॉमर्स में विस्तार करके आगे बढ़ना होगा। अभी जिस रेस्टोरेंट पार्टनरशिप मॉडल पर वे चल रहे हैं, वह एक बड़े रीसेट (बदलाव) से गुजर रहा है।

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Disclaimer:This content is for educational and informational purposes only and does not constitute investment, financial, or trading advice, nor a recommendation to buy or sell any securities. Readers should consult a SEBI-registered advisor before making investment decisions, as markets involve risk and past performance does not guarantee future results. The publisher and authors accept no liability for any losses. Some content may be AI-generated and may contain errors; accuracy and completeness are not guaranteed. Views expressed do not reflect the publication’s editorial stance.