हैदराबाद स्थित Skyroot Aerospace ने **$300 मिलियन** जुटाने की तैयारी शुरू कर दी है, जिससे कंपनी की वैल्यूएशन **$3 अरब** तक पहुंच सकती है। महज चार महीने पहले कंपनी **$1.1 अरब** की वैल्यूएशन पर थी। Fidelity और Benchmark जैसे बड़े ग्लोबल निवेशकों की दिलचस्पी ने इस सेक्टर में जबरदस्त जोश भर दिया है।
वैल्यूएशन में जबरदस्त उछाल
महज चार महीनों के भीतर कंपनी की वैल्यूएशन का लगभग तीन गुना होना इसकी तकनीकी सफलता को दर्शाता है। 18 जुलाई, 2026 को कंपनी के Vikram-1 ऑर्बिटल लॉन्च व्हीकल का सफल परीक्षण इस डील के पीछे का मुख्य ट्रिगर है। Pawan Kumar Chandana और Naga Bharath Daka द्वारा साल 2018 में शुरू की गई यह कंपनी भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर में एक मजबूत नाम बनकर उभरी है।
ग्लोबल निवेशकों का भरोसा
इस राउंड में ग्लोबल वेंचर कैपिटल फर्मों की लंबी कतार है। उम्मीद है कि Fidelity इसमें $170 मिलियन से $190 मिलियन के निवेश के साथ लीड करेगी। वहीं, General Catalyst करीब $80 मिलियन का निवेश कर सकती है। दिग्गज अमेरिकी फर्म Benchmark भी भारतीय बाजार में अपनी एंट्री $20 मिलियन से $30 मिलियन के निवेश के साथ करने की योजना बना रही है। साथ ही, पुराने निवेशक GIC और BlackRock भी अपनी हिस्सेदारी बरकरार रखने के लिए इसमें शामिल हो सकते हैं।
स्पेस सेक्टर के जोखिम और चुनौतियां
हालांकि यह खबर स्पेस सेक्टर के लिए उत्साहजनक है, लेकिन निवेशकों को यह याद रखना चाहिए कि यह एक कैपिटल-इंटेंसिव इंडस्ट्री है। सॉफ्टवेयर या सर्विस बिजनेस के मुकाबले, स्पेस कंपनियों को रेवेन्यू और प्रॉफिट तक पहुंचने में लंबा वक्त लगता है। सफलता पूरी तरह से IN-SPACe के नियमों, पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप और कंपनी द्वारा कैश फ्लो के मैनेजमेंट पर निर्भर करती है। भविष्य में निवेशकों को कंपनी के कमर्शियल लॉन्च साइकिल और तकनीकी लक्ष्यों पर कड़ी नजर रखनी होगी।
