Shree Salasar Investments जुटाएगी ₹323.75 करोड़: बोर्ड ने दी प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी
Shree Salasar Investments Limited के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स ने कंपनी के कैपिटल बेस को मजबूत करने के लिए एक बड़े कदम के तहत, 18,50,000 वॉरंट्स (Warrants) के प्रेफरेंशियल इश्यू को हरी झंडी दे दी है। ये वॉरंट्स ₹175 प्रति शेयर की दर से इक्विटी शेयर्स में कन्वर्ट किए जा सकेंगे, जिससे कंपनी को कुल ₹323.75 करोड़ का महत्वपूर्ण फंड जुटाने में मदद मिलेगी। इन वॉरंट्स को अलॉटमेंट की तारीख से 18 महीने के भीतर एक्सरसाइज किया जा सकेगा।
इस फंडरेज़िंग प्लान को अमली जामा पहनाने के लिए कंपनी को अपने शेयरहोल्डर्स की मंजूरी की आवश्यकता होगी, जिसके लिए एक एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाई जाएगी। यह प्रेफरेंशियल इश्यू कंपनी के विस्तार, रणनीतिक अधिग्रहण, कर्ज चुकाने या बैलेंस शीट को मजबूत करने जैसे अहम कामों के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, वॉरंट्स के इक्विटी शेयर्स में बदलने से मौजूदा शेयरहोल्डर्स की हिस्सेदारी में डाइल्यूशन (Dilution) का जोखिम भी बना रहता है।
कंपनी ने पहले भी वॉरंट्स के जरिए फंड जुटाने की मंशा जताई थी, जिसका एक प्रस्ताव 11 फरवरी 2026 को हुई बोर्ड मीटिंग में भी विचाराधीन था। यह फैसला कंपनी के हालिया मजबूत वित्तीय प्रदर्शन के बाद आया है। Q3 FY26 (31 दिसंबर 2025 को समाप्त तिमाही) में, Shree Salasar Investments का रेवेन्यू पिछले साल की समान अवधि के ₹121.37 मिलियन की तुलना में बढ़कर ₹310.14 मिलियन हो गया था। वहीं, नेट इनकम भी ₹13.29 मिलियन से बढ़कर ₹53.8 मिलियन पर पहुंच गई थी।
इस कदम से कंपनी का कैपिटल बेस बढ़ेगा, जिससे उसे विस्तार और अन्य रणनीतिक पहलों के लिए आवश्यक पूंजी मिलेगी। यह बढ़ी हुई वित्तीय क्षमता कंपनी को बेहतर लचीलापन प्रदान करेगी। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी और सेबी (SEBI) जैसे नियामकों से आवश्यक अप्रूवल प्राप्त करना महत्वपूर्ण होगा।
इस फंडरेज़िंग प्रक्रिया में कुछ जोखिम भी शामिल हैं। सबसे बड़ा जोखिम शेयरहोल्डर्स की ईजीएम (EGM) में इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट करने का है, जो फंड जुटाने की योजना को रोक सकता है। इसके अलावा, यह भी संभव है कि आवंटित वॉरंट्स को 18 महीने की अवधि में पूरी तरह से एक्सरसाइज न किया जाए। सेबी (SEBI) के आईसीडीआर रेगुलेशंस (ICDR Regulations) के अनुसार, इश्यू प्राइस को उचित मूल्यांकन बनाए रखने के लिए वी-वॉट (VWAP) जैसी प्राइसिंग गाइडलाइन्स का पालन करना होगा। अप्रूवल मिलने में देरी या अलॉटमेंट प्रक्रिया में व्यवधान भी जोखिम पैदा कर सकते हैं।
आगे निवेशकों की नजर Shree Salasar Investments की ईजीएम (EGM) के नतीजों पर रहेगी, जहां शेयरहोल्डर्स प्रेफरेंशियल इश्यू को मंजूरी देंगे या नहीं। वॉरंट्स के अलॉटमेंट का पूरा होना, आवश्यक नियामक मंजूरी मिलना, और अंततः वॉरंट्स का इक्विटी शेयर्स में बदलना - ये सभी वो अहम पड़ाव होंगे जिन पर बाजार की नजर रहेगी। साथ ही, यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जुटाए गए फंड का इस्तेमाल कंपनी के विकास और वित्तीय प्रदर्शन को कैसे बेहतर बनाता है।
