Shree Cement ने Q1 FY27 में **17%** की वॉल्यूम ग्रोथ दर्ज की है, लेकिन बढ़ती फ्यूल और फ्रेट लागतों ने मुनाफे पर दबाव डाला है। सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते कंपनी को महंगे घरेलू कोयले का सहारा लेना पड़ा।
लागतों का बढ़ा बोझ, मार्जिन पर असर
Shree Cement लिमिटेड ने 2027 फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही (Q1 FY27) के नतीजे पेश किए हैं। कंपनी ने बिक्री की मात्रा (volume) में पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 17% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की। हालांकि, बढ़ती परिचालन लागतों (operational costs) ने कंपनी के मुनाफे को झटका दिया है।
इस तिमाही में कंपनी के मार्जिन पर सबसे बड़ा असर पावर, फ्यूल और फ्रेट (माल ढुलाई) की कीमतों में आई भारी बढ़ोतरी का रहा। कंपनी को मिडिल ईस्ट में जारी संघर्षों के कारण पेट कोक (pet coke) और जिप्सम (gypsum) की कॉन्ट्रैक्टेड सप्लाई में दिक्कतें आईं। प्रोडक्शन जारी रखने के लिए Shree Cement को महंगे घरेलू कोयले का इस्तेमाल करना पड़ा, जिसकी क्वालिटी भी उतनी अच्छी नहीं थी। इस वजह से क्लिंकर कन्वर्जन एफिशिएंसी (clinker conversion efficiency) में गिरावट आई और कंपनी को ज्यादा ऑर्डिनरी पोर्टलैंड सीमेंट (OPC) बेचनी पड़ी, जिसका मार्जिन प्रोफाइल आमतौर पर ब्लेन्डेड या प्रीमियम प्रोडक्ट्स से अलग होता है।
EBITDA प्रति टन में गिरावट
परिचालन दक्षता (operational efficiency) के प्रमुख मापक, कंपनी के अर्निंग्स बिफोर इंटरेस्ट, टैक्सेस, डेप्रिसिएशन और एमोर्टाइजेशन (EBITDA) प्रति टन का आंकड़ा गिरकर ₹1,024 पर आ गया। यह कई एनालिस्टों की उम्मीदों से कम रहा। कंपनी ने बेहतर प्रोडक्ट प्राइसिंग और प्रीमियम पेशकशों पर ध्यान केंद्रित करके अपने ब्लेन्डेड नेट सेलिंग रेट (blended net selling rate) में 2.3% का सुधार किया, लेकिन इनগুলোর से इनपुट लागतों में अचानक हुई वृद्धि की भरपाई नहीं हो सकी।
भविष्य की राह और रणनीति
मैनेजमेंट को उम्मीद है कि पेट कोक के लिए सप्लाई चेन के सामान्य होने से दूसरी तिमाही (Q2 FY27) से लागत का दबाव कम होगा। कंपनी इस फाइनेंशियल ईयर के लिए अपने वॉल्यूम ग्रोथ टारगेट पर कायम है और कुल 40 मिलियन टन बिक्री का अनुमान लगा रही है, जो पिछले साल से 10% ज्यादा होगा। निवेशकों के लिए, कंपनी की ऐतिहासिक मार्जिन स्तरों पर वापसी इस बात पर निर्भर करेगी कि ऊर्जा सप्लाई चेन कितनी जल्दी सामान्य होती है और प्रतिस्पर्धी बाजार में कंपनी अपनी प्राइसिंग पावर (pricing power) को कितना बनाए रख पाती है।
आगे चलकर, बाजार यह देखेगा कि क्या कच्चे माल की सप्लाई के सामान्य होने का वादा पूरा होता है। आने वाली तिमाहियों में कोयले और पेट कोक की कीमतों में उतार-चढ़ाव, प्रीमियम प्रोडक्ट की बिक्री की वास्तविक मात्रा और कंपनी की फ्रेट लागतों को प्रभावी ढंग से प्रबंधित करने की क्षमता पर नजर रखी जाएगी।
