Shiprocket का ₹1,617.48 करोड़ का IPO 12 अगस्त 2026 को खुलेगा, जिसमें प्राइस बैंड ₹92-₹97 प्रति शेयर होगा। ग्रे मार्केट के रुझान से लिस्टिंग पर करीब 28% के मुनाफे का संकेत मिल रहा है। कंपनी कर्ज घटाने और अपने प्लेटफॉर्म का विस्तार करने पर ध्यान दे रही है, और हालिया आंकड़ों से वित्तीय घाटे में कमी आई है।
Shiprocket IPO: निवेशकों के लिए बड़ा मौका
लॉजिस्टिक्स कंपनी Shiprocket जल्द ही शेयर बाजार में कदम रखने वाली है। कंपनी का इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 12 अगस्त 2026 को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इस IPO के लिए प्राइस बैंड ₹92 से ₹97 प्रति शेयर तय किया गया है। इस इश्यू के जरिए कंपनी कुल ₹1,617.48 करोड़ जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
ग्रे मार्केट में कैसा है क्रेज?
ग्रे मार्केट (Grey Market) में Shiprocket के IPO को लेकर जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। खबरें हैं कि ग्रे मार्केट में शेयर ₹26-₹27 के प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं। यह ऊपरी प्राइस बैंड पर लगभग 28% के लिस्टिंग गेन (Listing Gain) का संकेत दे रहा है।
IPO का स्ट्रक्चर और वैल्यूएशन
इस IPO में दो हिस्से होंगे: ₹885.50 करोड़ का फ्रेश इश्यू (Fresh Issue) और मौजूदा शेयरधारकों द्वारा ₹731.98 करोड़ का ऑफर फॉर सेल (OFS)। अपर प्राइस बैंड पर कंपनी का मार्केट कैप (Market Cap) लगभग ₹7,057.5 करोड़ रहने का अनुमान है। यह IPO तीन दिनों के लिए खुला रहेगा और 14 अगस्त 2026 को बंद हो जाएगा।
वित्तीय प्रदर्शन: घाटे में आई कमी
Shiprocket ने पिछले कुछ सालों में घाटा दर्ज किया है, लेकिन कंपनी के हालिया वित्तीय आंकड़े एक सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं। फाइनेंशियल ईयर 2026 में कंपनी ने ₹79.25 करोड़ का नेट लॉस (Net Loss) दर्ज किया, जो FY24 के ₹595.18 करोड़ के घाटे से काफी कम है। इसी अवधि में कंपनी का कुल इनकम (Total Income) ₹2,077.42 करोड़ रहा, जो बताता है कि कंपनी रेवेन्यू बढ़ाने के साथ-साथ प्रॉफिटेबिलिटी की ओर बढ़ रही है।
फंड का इस्तेमाल और भविष्य की योजनाएं
IPO से जुटाई गई राशि का उपयोग कंपनी के लॉन्ग-टर्म ग्रोथ (Long-term Growth) के लिए किया जाएगा। इसमें से ₹365.6 करोड़ टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर (Technology Infrastructure) और मार्केटिंग (Marketing) पर खर्च होंगे। वहीं, ₹210 करोड़ का इस्तेमाल मौजूदा कर्ज (Debt) चुकाने में होगा, जिससे ब्याज का बोझ कम होगा। बाकी बचे पैसों का इस्तेमाल संभावित अधिग्रहण (Acquisitions) के लिए किया जा सकता है।
निवेशकों के लिए जरूरी बातें
लॉजिस्टिक्स सेक्टर (Logistics Sector) काफी प्रतिस्पर्धी है और Shiprocket का प्रदर्शन भारतीय ई-कॉमर्स मार्केट (E-commerce Market) के विकास से जुड़ा हुआ है। ऑर्डर वॉल्यूम में उतार-चढ़ाव कंपनी के रेवेन्यू को प्रभावित कर सकता है। ग्रे मार्केट प्रीमियम (GMP) मजबूत संकेत दे रहा है, लेकिन यह सेंटिमेंट पर आधारित है और बाजार की अस्थिरता के कारण बदल सकता है। IPO का फाइनल अलॉटमेंट (Allotment) और लिस्टिंग (Listing) 19 अगस्त 2026 के आसपास होने की उम्मीद है।
