Fast fashion की दुनिया की जानी-मानी कंपनी Shein ने हांगकांग में IPO लाने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी **$40 अरब** से **$50 अरब** का वैल्यूएशन चाह रही है। हालांकि, पिछले कुछ समय से कंपनी की कमाई में आई गिरावट और बढ़ती लागतों को लेकर निवेशक थोड़ी सावधानी बरत रहे हैं।
Detailed Coverage
IPO वैल्यूएशन में बड़ी कटौती
Shein की IPO के लिए $40 अरब से $50 अरब का वैल्यूएशन टारगेट, 2022 में $98.2 अरब और 2024 में $64 अरब के पिछले वैल्यूएशन से काफी कम है। यह दिखाता है कि बाज़ार में कंपनी की ग्रोथ को लेकर थोड़ी चिंता है।
कमाई और मुनाफे पर दबाव
2025 के फाइनेंशियल रिकॉर्ड्स के मुताबिक, Shein का रेवेन्यू 8% बढ़कर $41.8 अरब हो गया, लेकिन नेट प्रॉफिट 39% घटकर $2.06 अरब रह गया। वहीं, इस साल की पहली तिमाही में कंपनी को $99 मिलियन का घाटा भी हुआ है। कंपनी का कहना है कि इसमें $328 मिलियन का अकाउंटिंग एडजस्टमेंट भी शामिल है, लेकिन फिर भी मुनाफे पर दबाव साफ दिख रहा है। कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन करीब 2.9% है, और अब फोकस इस बात पर है कि कंपनी बढ़ती लागतों को कैसे मैनेज करती है।
ग्लोबल ट्रेड नियमों का असर
Shein का बिजनेस मॉडल सीधे ग्राहकों को सस्ते सामान भेजना है, लेकिन बदलते ट्रेड नियमों से इसे मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका में 'डी मिनिमिस' छूट हटने से इम्पोर्ट कॉस्ट बढ़ गई है, जिससे बिक्री पर असर पड़ रहा है। इस वजह से Shein को अमेरिका में अपने ग्राहकों के लिए कीमतें बढ़ानी पड़ सकती हैं।
यूरोप में भी कम कीमत वाले इम्पोर्ट पर नए टैक्स लग रहे हैं, जिससे Shein को अमेरिका जैसी ही या उससे भी ज्यादा चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में, कंपनी को टॉप-लाइन ग्रोथ बनाए रखने के लिए दूसरे देशों में विस्तार पर ज्यादा निर्भर रहना पड़ रहा है। कुछ जानकारों का मानना है कि इससे Shein का कॉम्पिटिटिव एडवांटेज कम हो सकता है, और H&M और Primark जैसी कंपनियों को फायदा हो सकता है।
वैल्यूएशन और ग्रोथ की चुनौतियां
IPO में पिछले फंडरेज़िंग राउंड से कम वैल्यूएशन मिलने की संभावना, फास्ट फैशन सेक्टर को लेकर बाज़ार की मौजूदा चिंताओं को दिखाती है। निवेशक कंपनी की पुरानी ग्रोथ को ई-कॉमर्स में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड की बढ़ती लागतों के सामने तौल रहे हैं। आगे चलकर, कंपनी के लिए यह देखना अहम होगा कि वह अमेरिका और यूरोप में अपनी मार्केट शेयर कैसे बनाए रखती है और इम्पोर्ट ड्यूटी जैसे मुद्दों से कैसे निपटती है। निवेशकों की नज़र इस बात पर भी होगी कि मैनेजमेंट मार्जिन सुधारने और आगे के लिए प्रॉफिट का स्पष्ट आउटलुक कैसे पेश करती है।
