गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री Shankersinh Vaghela ने एक रैली के दौरान जातिगत टिप्पणियों से बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कुछ जातियों को लेकर विवादास्पद बयान दिया है, जिससे न केवल राजनीतिक गलियारों में खलबली मची है, बल्कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले Congress में उनकी संभावित वापसी की राह भी मुश्किल हो गई है।
आरक्षण पर दिया विवादास्पद बयान
गुजरात के पूर्व सीएम Shankersinh Vaghela, जो अपनी बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं, इस बार मुश्किलों में घिर गए हैं। 2 अक्टूबर, 2026 को नर्मदा जिले में 'फॉरेस्ट राइट्स सत्याग्रह' के दौरान उन्होंने मंच से कहा कि अगर पटेल, बनिया और ब्राह्मण समुदाय के लोग मैनुअल स्कैवेंजिंग (सफाई कार्य) करने को तैयार हों, तो वे उन्हें ₹50,000 प्रति माह वेतन देंगे।
राजनीतिक विरोध और विवाद
इस बयान के बाद विपक्षी दलों, विशेषकर Bharatiya Janata Party ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं का कहना है कि यह न केवल जातिवादी मानसिकता को दर्शाता है, बल्कि देश में प्रतिबंधित मैनुअल स्कैवेंजिंग का अपमान भी है। आलोचकों ने इसे सामाजिक सद्भाव बिगाड़ने वाला कदम बताते हुए Vaghela से सार्वजनिक माफी की मांग की है।
Congress में वापसी की संभावनाओं पर असर
Vaghela पिछले एक दशक से अधिक समय से Congress से दूर हैं, लेकिन हाल के दिनों में उनकी पार्टी में घर वापसी की चर्चाएं तेज थीं। हालांकि, इस विवादित बयान के बाद कांग्रेस नेतृत्व के लिए एक नया 'पॉलिटिकल रिस्क' पैदा हो गया है। पार्टी के रणनीतिकार अब 2027 के Gujarat Assembly Elections के लिए अपनी योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं, और Vaghela की हालिया बयानबाजी ने उनके फिर से शामिल होने की प्रक्रिया को और जटिल बना दिया है।
अब देखना यह होगा कि क्या यह कंट्रोवर्सी Vaghela के राजनीतिक भविष्य पर पूर्ण विराम लगाती है या पार्टी नेतृत्व कोई बीच का रास्ता निकालता है।
